₹3200 करोड़ फॉरेक्स घोटाला, मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की कार्रवाई में इनामी ऋषिकेश राय नोएडा से पकड़ा गया, पहले ही गिरफ्त में 16 आरोपी

मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में फॉरेन एक्सचेंज ट्रेडिंग के नाम पर की गई हजारों करोड़ रुपये की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस बहुचर्चित फर्जीवाड़े की जांच कर रही मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स को अहम सफलता मिली है। टीम ने लंबे समय से फरार चल रहे रैनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के संचालक ऋषिकेश राय को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है। उस पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह जांच एजेंसियों से बचता फिर रहा था।

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक गुप्त सूचना के आधार पर नोएडा में उसकी मौजूदगी का इनपुट मिला था। इसके बाद संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी रखी गई और सेक्टर-77 क्षेत्र में उसकी गतिविधियों की पुष्टि होते ही पुलिस ने घेराबंदी कर दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ शुरू कर दी गई है, जिससे इस अंतरराज्यीय ठगी नेटवर्क के कई अहम राज खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि लोगों से ठगे गए कुल पैसों में से लगभग 2062 करोड़ रुपये रैनेट टेक्नोलॉजी के खातों में जमा हुए थे। यही कंपनी इस पूरे फर्जी निवेश नेटवर्क का वित्तीय केंद्र बनी हुई थी। एजेंसियों को शक है कि यहीं से रकम को आगे विभिन्न खातों और चैनलों के माध्यम से घुमाया गया।

एसटीएफ के अनुसार इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड नवाब उर्फ लविश चौधरी है, जो फिलहाल दुबई में बैठकर नेटवर्क संचालित कर रहा है। उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया जा चुका है और भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू की गई है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित है। अब तक इस मामले में 16 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। एजेंटों के माध्यम से लोगों को विदेशी मुद्रा बाजार में निवेश कराने का झांसा दिया जाता था। छह से आठ प्रतिशत तक नियमित रिटर्न का लालच देकर भरोसा बनाया जाता और यॉर्कर कैपिटल, यॉर्कर एफएक्स, बाटब्रो जैसी अपंजीकृत कंपनियों में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। निवेशकों को फर्जी ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उनकी रकम बढ़ती हुई दिखाई जाती, जिससे वे और लोगों को भी जोड़ते चले जाते।

इंदौर के एक पीड़ित ने इस संबंध में 18 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह रकम हजारों लोगों से छोटे-बड़े निवेश के रूप में जुटाई गई थी। अब गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ के जरिए पैसों की आवाजाही, अन्य साथियों की भूमिका और नेटवर्क के विस्तार की जानकारी जुटाई जा रही है।