उज्जैन के अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में बच्चों की मौतों का मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच 51 दिनों में 11 बच्चों की मौत हुई।
मृतकों में अधिकतर बच्चे बहु-दिव्यांग थे और उनकी उम्र 10 से 18 वर्ष के बीच थी। सभी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था।
मामले में बीते एक साल में कुल 17 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने बुधवार को संज्ञान लिया। कोर्ट ने राज्य और जिला प्रशासन के छह अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है।
हाईकोर्ट ने किन अधिकारियों से मांगा जवाब
कोर्ट ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, संबंधित आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस भेजा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आश्रम की वास्तविक स्थिति, चिकित्सकीय देखभाल, बच्चों की स्वास्थ्य प्रोफाइल और मृत्यु के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब लगातार दो महीनों के दौरान मौतों का सिलसिला दर्ज हुआ। शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड में दिसंबर 2025 में 8 बच्चों और जनवरी 2026 में अब तक 2 बच्चों की मौत दर्ज है। इसी अवधि में कुल संख्या 11 बताई गई है, जिससे स्पष्ट है कि एक मौत नवंबर के अंतिम हिस्से में दर्ज हुई थी।
पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया और अस्पताल का पक्ष
मृत सभी बच्चों का पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल के पोस्टमॉर्टम कक्ष में कराया गया। पूरी प्रक्रिया थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में हुई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार हर मामले में नियमानुसार दस्तावेजी कार्रवाई पूरी की गई।
अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर के मुताबिक बच्चों को अस्पताल में गंभीर स्थिति में लाया गया था। कुछ बच्चों को मृत अवस्था में पहुंचाया गया, जबकि कुछ की इलाज के दौरान मृत्यु हुई। उपलब्ध मेडिकल आकलन में कई मामलों में एनीमिया सामने आया है।
आश्रम में 250 बच्चे, 50 से अधिक की हालत गंभीर
अंकित सेवाधाम आश्रम में फिलहाल करीब 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल के अनुसार इनमें 50 से ज्यादा बच्चों की हालत गंभीर है। उनका कहना है कि यहां आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं।

आश्रम प्रबंधन के मुताबिक कई बच्चे ऐसे हैं जो चलने, उठने या स्वयं भोजन करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे बच्चों के लिए लगातार देखभाल, पोषण और चिकित्सा सहयोग की जरूरत होती है। यही वजह है कि चिकित्सा जोखिम का स्तर सामान्य संस्थानों की तुलना में अधिक रहता है।
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