New Delhi: भारतीय संसदीय इतिहास में शुक्रवार का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा, जहां मोदी सरकार अपने 12 साल के कार्यकाल में पहली बार सदन में कोई महत्वपूर्ण बिल पास कराने में विफल रही।
सरकार द्वारा लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल, जिसमें लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था, वोटिंग के दौरान गिर गया। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने शनिवार को तीखी प्रतिक्रिया दी है।
प्रियंका गांधी का बयान: ‘लोकतंत्र की जीत’
प्रियंका गांधी ने बिल गिरने को लोकतंत्र की बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने कहा, “सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण की आड़ में अपनी सीटें बढ़ाकर सत्ता में बने रहने की साजिश रच रही थी। मैं खुश हूं कि विपक्ष ने एकजुट होकर इसका विरोध किया।” प्रियंका ने सत्ता पक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि हमें ‘महिला विरोधी’ बताकर भाजपा मसीहा नहीं बन सकती।
कैसे गिरा बिल? आंकड़ों का गणित
लोकसभा में इस बिल पर करीब 21 घंटे तक मैराथन चर्चा हुई, जिसके बाद वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई:
कुल उपस्थित सांसद: 528
पक्ष में वोट: 298
विपक्ष में वोट: 230
जरूरी बहुमत: संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई (352 वोट) की आवश्यकता थी।
नतीजा: बिल लक्ष्य से 54 वोट पीछे रह गया और गिर गया।
क्या होगा असर?
इस बिल के गिरने का सबसे बड़ा असर महिला आरक्षण पर पड़ेगा। अब नई जनगणना के नतीजे आने से पहले महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा, जिसका अर्थ है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को इस आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा।
दो अन्य बिलों पर नहीं हुई वोटिंग
मुख्य बिल गिरने के बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने परिसीमन संशोधन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि ये दोनों बिल पहले बिल से ही जुड़े हुए थे, इसलिए अब इनका कोई औचित्य नहीं रह गया है।
विपक्ष इस परिणाम को अपनी बड़ी नैतिक जीत मान रहा है, जबकि सरकार के लिए यह सदन के भीतर एक बड़ा विधायी झटका है।