उज्जैन/भोपाल: उज्जैन की महज 5 महीने की मासूम बेटी काशी एक ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, जिसका इलाज मध्यवर्गीय क्या, संपन्न परिवारों की पहुंच से भी कोसों दूर है। काशी को ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (SMA) टाइप-1 नामक आनुवांशिक बीमारी है। इस नन्ही जान को बचाने के लिए जीन थेरेपी की जरूरत है, जिसमें लगने वाले एक अकेले इंजेक्शन की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये है।
क्या है यह दुर्लभ बीमारी?
SMA टाइप-1 एक गंभीर जेनेटिक डिसऑर्डर है। इसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं और बेहद कमजोर हो जाती हैं। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह बीमारी जानलेवा साबित होती है। काशी के पिता डॉ. रोहित दुबे पुरिया (भोपाल एम्स में सीनियर रेसिडेंट) और मां डॉ. प्रकृति (स्त्री रोग विशेषज्ञ) ने बताया कि जन्म के एक महीने बाद भी जब काशी के हाथ-पैरों में मूवमेंट नहीं दिखा, तब जांच के बाद इस बीमारी की पुष्टि हुई।
15 करोड़ का ‘जोलजेनस्मा’ इंजेक्शन ही एकमात्र उम्मीद
काशी के इलाज के लिए ‘जोलजेनस्मा’ (Zolgensma) नामक इंजेक्शन की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 1.72 मिलियन डॉलर है। यह इंजेक्शन भारत में उपलब्ध नहीं है और इसे विदेश से मंगवाना होगा। फिलहाल काशी का इलाज भोपाल एम्स की डॉ. भावना डिगरे की देखरेख में चल रहा है।
मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा परिवार
मासूम की जान बचाने के लिए डॉक्टर माता-पिता अपनी जमापूंजी लगा चुके हैं, लेकिन 15 करोड़ की भारी-भरकम राशि जुटाना उनके लिए नामुमकिन है।
अब तक का फंड: ऑनलाइन फंड रेजिंग और चैरिटी शो के जरिए अब तक करीब 30 लाख रुपये ही जमा हो पाए हैं।
सीएम से गुहार: परिवार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और आम जनता से आर्थिक मदद की अपील की है।
डॉ. प्रकृति ने अपनी बेटी की देखभाल के लिए एक साल से नौकरी छोड़ दी है। परिवार का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ इस बीमारी का जोखिम भी बढ़ता जाता है, इसलिए जल्द से जल्द जीन थेरेपी मिलना अनिवार्य है।
अपील: यदि आप काशी की मदद करना चाहते हैं, तो ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपना योगदान दे सकते हैं। आपकी एक छोटी सी मदद इस मासूम को नई जिंदगी दे सकती है।