मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के कुंडावत गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार को एक पुराना कुआं अचानक लोगों की जान का शिकार बन गया। यह हादसा तब हुआ जब ग्रामीण गणगौर माता के विसर्जन से पहले कुएं की सफाई करने उतरे थे। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
कैसे हुआ हादसा?
नवरात्रि के दौरान गांव में गणगौर माता की मूर्ति की स्थापना की गई थी। विसर्जन के लिए कुएं की सफाई जरूरी थी, इसलिए कुछ स्थानीय लोग कुएं में उतर गए। शुरुआत में तीन लोग कुएं में गए, लेकिन अचानक उनकी आवाज़ें रुक गईं। इन लोगों को बचाने के लिए पांच और लोग कुएं में उतर गए, लेकिन कुछ ही देर में उनकी भी आवाज़ें बंद हो गईं। इस पर घबराए ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
हादसे का कारण – दलदल और जहरीली गैस
खबरों के मुताबिक, कुएं में दलदल और गंदगी का समावेश था, जिससे जहरीली गैस बन गई। इसे ही हादसे का मुख्य कारण बताया जा रहा है। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमों ने मिलकर शवों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। अब तक छह शव बाहर निकाले जा चुके हैं और दो शवों की तलाश जारी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अधिकारी
घटनास्थल पर खंडवा SP मनोज कुमार राय, कलेक्टर ऋषव गुप्ता, SDM बजरंग बहादुर सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें जुटी हुई हैं।
आर्थिक सहायता का ऐलान
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया है। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। यह सहायता राशि मृतकों के परिजनों को जल्दी दी जाएगी ताकि वे इस कठिन समय में कुछ सहारा पा सकें।
हादसे में जान गंवाने वाले लोग
इस भयानक हादसे में जिन आठ लोगों की मौत हुई, वे सभी गांव के थे:
- राकेश पिता हरी (21 साल)
- वासुदेव पिता आत्माराम (40 साल)
- अर्जुन पिता गोविंद (35 साल)
- गजानन पिता गोपाल (35 साल)
- मोहन पिता मंसाराम पटेल (48 साल) – पूर्व सरपंच
- अजय पिता मोहन (25 साल)
- शरण पिता सुखराम (37 साल)
- अनिल पिता आत्माराम (25 साल)
घटनास्थल पर प्रशासनिक जांच जारी
एसपी मनोज कुमार राय ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि इस प्रकार के हादसों से बचने के लिए गांवों में प्रशासनिक निगरानी बढ़ानी होगी। साथ ही, सुरक्षा उपायों को और सख्त करने की आवश्यकता जताई गई है।