Indore News : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की पुलिस एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। परदेशीपुरा थाने पर आरोप लगा है कि वहां तैनात एक पुलिसकर्मी ने पैसे लेकर अवैध हथियार के साथ पकड़े गए दो युवकों को छोड़ दिया, जबकि एक निर्दोष और गरीब मजदूर पर झूठे आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज कर दिया।
यह पूरा मामला अब इंदौर के पुलिस कमिश्नर तक पहुंच गया है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
शिकायत में परदेशीपुरा थाने में पदस्थ देवेंद्र कुशवाहा का नाम सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने कानून का सौदा करते हुए अपराधियों को संरक्षण दिया और एक बेगुनाह को सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी कर ली।
पिस्तौल के साथ पकड़े, 80 हजार में डील?
सूत्रो के अनुसार, पुलिस ने राहुल ठाकुर और युवराज भट्ट नाम के दो युवकों को अवैध पिस्तौल के साथ पकड़ा था। उन्हें थाने भी लाया गया, लेकिन आरोप है कि कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उनसे 80 हजार रुपये की डील की गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि पैसे मिलते ही दोनों आरोपियों को बिना किसी रिकॉर्ड के थाने से ही रिहा कर दिया गया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर किसके अधिकार से हथियारबंद आरोपियों को छोड़ा गया।
गरीब पेंटर को बनाया निशाना
इसी मामले का दूसरा पहलू और भी चौंकाने वाला है। दीपक कुशवाहा, जो पुताई का काम करके अपना घर चलाता है, देर रात पुलिस की कार्रवाई का शिकार बना। पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और बाहर उसकी तलाशी ली। इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि तलाशी के दौरान दीपक के पास से कोई भी आपत्तिजनक वस्तु, जैसे चाकू या पिस्तौल, बरामद नहीं हुई।
इसके बावजूद, पुलिस दीपक को अपने साथ थाने ले गई। आरोप है कि थाने ले जाते समय रास्ते में उस पर एक चाकू रखकर आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत केस बना दिया गया। यानी, जो युवक अपने घर के बाहर बेगुनाह था, वह थाने पहुंचने से पहले ही अपराधी बना दिया गया।
कमिश्नर से शिकायत, CCTV फुटेज की जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस कमिश्नर से लिखित शिकायत की है। शिकायत में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में आरोपियों को छोड़ने और दीपक के घर के बाहर हुई तलाशी, दोनों घटनाएं कैद हैं।
मांग की जा रही है कि इन सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही, रिश्वत लेकर आरोपियों को छोड़ने और निर्दोष को फंसाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या यह किसी एक पुलिसकर्मी का काम है या इस खेल में और भी लोग शामिल हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस कमिश्नर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।