2025 कोड लागू, अब इमारतों को बनाना होगा और मजबूत

भारत में भूकंप का जोखिम पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गया है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा जारी नया सीस्मिक जोनेशन मैप इस खतरे की गंभीरता को सामने लाता है। इस अपडेटेड नक्शे ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें हिमालय की पूरी श्रृंखला—कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक—को अब सबसे खतरनाक जोन VI में शामिल कर दिया गया है। यह बदलाव साफ संकेत देता है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भूकंप का खतरा बेहद गंभीर हो चुका है।

देश का बड़ा हिस्सा अब उच्च जोखिम वाले भूकंप जोन में

नई वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार, देश का लगभग 61% भूभाग अब मध्यम से उच्च जोखिम वाले जोन—III, IV, V और VI—में प्रवेश कर चुका है। हैरानी की बात यह है कि देश की 75% आबादी अब ऐसे इलाकों में रहती है जहाँ बड़े भूकंप से जानमाल की भारी हानि की संभावना है। पहले वाले नक्शे में हिमालयी क्षेत्र जोन IV और V में थे, लेकिन शोध के नए निष्कर्ष बताते हैं कि बीते दो सौ वर्षों से इन क्षेत्रों में भू-प्लेटें लॉक हैं, जिससे भारी तनाव जमा हो चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन इलाकों में अगला बड़ा भूकंप 8.0 या उससे अधिक तीव्रता का हो सकता है।

2025 से नए भूकंप सुरक्षा नियम लागू

सीस्मिक जोनेशन मैप को IS 1893 (Part 1): 2025 कोड का हिस्सा बनाया गया है, जो जनवरी 2025 से पूरे देश में लागू हो चुका है। इसका उद्देश्य है कि नई इमारतें, हाईवे, पुल और अन्य संरचनाएँ भूकंप-रोधी मानकों के आधार पर डिजाइन हों। विशेषज्ञों के अनुसार, बाहरी हिमालय में आने वाले बड़े भूकंप अब दक्षिण दिशा में बढ़ते हुए हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट तक असर पहुंचा सकते हैं।

नई इमारतों के लिए सख्त मानक, सुरक्षा पर विशेष जोर

BIS ने साफ निर्देश दिया है कि नई इमारतों में 2025 वाला नया भूकंप सुरक्षा कोड अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, क्योंकि अब देश की तीन-चौथाई आबादी संवेदनशील क्षेत्रों में रह रही है।
नए नियमों में—

स्ट्रक्चरल (ढांचा)

नॉन-स्ट्रक्चरल (भीतरी हिस्से, सजावट, उपकरण) दोनों तरह की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। पहली बार यह भी अनिवार्य किया गया है कि इमारतों के भारी हिस्से, जिनका वजन कुल संरचना के 1% से अधिक है, उन्हें मजबूती से बांधा जाए ताकि भूकंप के समय गिरकर नुकसान या चोट न पहुंचें।

क्या है सीस्मिक जोनेशन मैप?

सरल शब्दों में, यह मैप देश को भूकंप के खतरे के आधार पर अलग-अलग जोनों में बांटता है—

  • जोन II – कम जोखिम
  • जोन III – मध्यम जोखिम
  • जोन IV – उच्च जोखिम
  • जोन V – बहुत उच्च जोखिम
  • जोन VI – अल्ट्रा-हाई रिस्क (नया जोन)

यह मैप पीक ग्राउंड एक्सेलरेशन (PGA) पर आधारित है, जो जमीन के हिलने की तीव्रता को ग्रेविटी (g) के प्रतिशत में मापता है।