अवध ओझा ने लिया राजनीति से सन्यास, AAP की सदस्यता से भी इस्तीफा

जाने-माने टीचर और युवा वर्ग में बेहद लोकप्रिय अवध ओझा ने राजनीति से दूरी बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। इसी के साथ उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की सदस्यता भी छोड़ दी है। इस वर्ष उन्होंने पटपड़गंज विधानसभा से AAP के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कदम रखा था, लेकिन उन्हें भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी सफर ने उन्हें कई नए अनुभव दिए, जिसके बाद उन्होंने राजनीति को अलविदा कहने का फैसला किया।

राजनीति छोड़ने के फैसले पर बोले—“अब ज्यादा खुश हूं, मन की बात कह सकता हूं”

राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद अवध ओझा ने एक पॉडकास्ट में खुलकर अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि राजनीतिक जीवन उनके स्वभाव और कार्यशैली के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीति से बाहर आते ही उन्हें पहले से अधिक आज़ादी महसूस हो रही है, क्योंकि अब वे बिना किसी दबाव के अपने विचार बेझिझक व्यक्त कर सकते हैं।

बचपन का सपना पूरा हुआ, लेकिन अनुभव ने बदला नजरिया

ओझा ने बताया कि उन्हें बचपन से राजनीति में आने की इच्छा थी। चुनाव लड़ना उनके जीवन की एक बड़ी चाहत थी। इस आकांक्षा को पूरा करते हुए उन्होंने पटपड़गंज की जनता से भरपूर सम्मान भी पाया और दूसरे स्थान पर रहे।

लेकिन उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया ने उन्हें कई सच्चाइयों से रूबरू कराया, और यही एहसास उनके निर्णय का आधार बना। उन्हें लगा कि राजनीति उनके लिए सही रास्ता नहीं है, इसलिए उन्होंने पीछे हटना ही बेहतर समझा।

अनुभव से मिली सीख—“राजनीति मेरे लिए नहीं बनी”

पॉडकास्ट में अवध ओझा ने साफ कहा कि चुनाव लड़ने के बाद उन्हें यह समझ आया कि वह राजनीतिक माहौल में सहज नहीं रह सकते। लोगों का स्नेह मिलने के बावजूद राजनीति की तेज रफ्तार और उसकी चुनौतियां उनके जीवन की प्राथमिकताओं से मेल नहीं खातीं। इसी वजह से उन्होंने राजनीति से संन्यास लेकर अपने मूल कार्य—शिक्षा और ज्ञान—पर वापस ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है