भोपाल में ‘बाबरी मस्जिद’ के विरोध में प्रदर्शन: हिंदू संगठनों और पुलिस के बीच झड़प, पोस्टर जब्त करने पर बढ़ा तनाव

पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। यहां हिंदू संगठनों ने इस मामले को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। भोपाल के 2 नंबर स्टॉप पर ‘श्री हिंदू उत्सव समिति’ और ‘संस्कृति बचाओ मंच’ के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके चलते दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की भी हुई।

प्रदर्शनकारी अपने साथ एक विवादास्पद पोस्टर लेकर पहुंचे थे। इस पोस्टर में एक शौचालय को बाबर का नाम दिया गया था। संगठन के कार्यकर्ता इस पोस्टर को सार्वजनिक शौचालय परिसर में चस्पा करने की योजना बना रहे थे।

हालाकि, मौके पर मौजूद पुलिस बल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पोस्टर को जब्त कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज कार्यकर्ताओं की पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हो गई।

‘बाबर के नाम पर मस्जिद बर्दाश्त नहीं’

संगठन के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में विदेशी आक्रांताओं के नाम पर किसी भी निर्माण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

“अगर मस्जिद बनानी ही है तो पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम या शहीद अशफाकउल्ला खान के नाम पर बनाएं। बाबर के नाम पर मस्जिद कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” — चंद्रशेखर तिवारी, अध्यक्ष, संस्कृति बचाओ मंच

तिवारी ने कहा कि उनका विरोध किसी धर्म विशेष से नहीं, बल्कि बाबर के नाम से है, जिसे वे एक आक्रांता मानते हैं। संगठनों का तर्क है कि देश के महापुरुषों के नाम पर संस्थानों का नामकरण होना चाहिए, न कि आक्रमणकारियों के नाम पर।

भारी पुलिस बल रहा तैनात

प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मौके पर क्विक रिस्पांस फोर्स (QRF) के 40 से अधिक जवान तैनात किए गए थे। इसके अलावा स्थानीय थाने के 25 से 30 पुलिसकर्मी भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौजूद रहे।

पुलिस की मुस्तैदी के कारण स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया गया, हालांकि काफी देर तक क्षेत्र में गहमागहमी का माहौल बना रहा।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम से एक नई मस्जिद की नींव रखने की खबरों के बाद से ही देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। भोपाल का यह प्रदर्शन उसी कड़ी का हिस्सा था, जहां संगठनों ने सांकेतिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराने की कोशिश की।