उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू : अब पुजारी-पुरोहित भी दिखेंगे एक ही ड्रेस में, आईडी कार्ड अनिवार्य

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्थाओं में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मंदिर प्रबंध समिति ने अब मंदिर के कर्मचारियों के साथ-साथ पुजारियों, पुरोहितों और उनके प्रतिनिधियों के लिए भी एक समान ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है।

इस फैसले का उद्देश्य मंदिर परिसर में अनुशासन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को और बेहतर बनाना है।

नई व्यवस्था के तहत, गर्भगृह और नंदी हॉल में सेवा देने वाले सभी अधिकृत व्यक्तियों को अब निर्धारित वेशभूषा में ही रहना होगा। इसके अलावा, ड्यूटी के दौरान गले में आईडी कार्ड (परिचय पत्र) पहनना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

अनाधिकृत प्रवेश पर लगेगा अंकुश

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने इस नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार मंदिर के सुरक्षाकर्मी और अन्य कर्मचारी एक तय ड्रेस कोड का पालन करते हैं, उसी तर्ज पर अब पुजारियों और पुरोहितों को भी एक ही वेशभूषा में देखा जाएगा।

कई बार यह देखा गया है कि सामान्य वेशभूषा का फायदा उठाकर कुछ अनधिकृत लोग पुजारी बनकर मंदिर परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

“कई बार अनधिकृत लोग पुजारी बनकर मंदिर परिसर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे व्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित होती है। इस नई व्यवस्था से ऐसी स्थिति पर रोक लगेगी और मंदिर की गरिमा बनी रहेगी।” — प्रथम कौशिक, प्रशासक, महाकाल मंदिर समिति

16 पुजारी और 22 पुरोहितों पर लागू होगा नियम

वर्तमान में महाकाल मंदिर समिति के रिकॉर्ड में 16 पंजीकृत पुजारी, 22 पुरोहित और उनके 45 प्रतिनिधि दर्ज हैं। अब तक इनके लिए कोई विशेष ड्रेस कोड निर्धारित नहीं था, जिससे भीड़ में इनकी अलग पहचान करना मुश्किल होता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद, यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन व्यक्ति मंदिर की सेवा के लिए अधिकृत है और कौन नहीं।

सुरक्षा और गरिमा के लिए उठाया कदम

मंदिर समिति का मानना है कि ड्रेस कोड और अनिवार्य आईडी सिस्टम लागू होने से मंदिर की आंतरिक व्यवस्था में कसावट आएगी। इससे श्रद्धालुओं को असली पुजारियों और अनाधिकृत व्यक्तियों के बीच अंतर करने में आसानी होगी, जिससे ठगी या असुविधा की आशंका कम हो जाएगी।

यह कदम मंदिर की गरिमा बनाए रखने और लाखों श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।