मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। गृह मंत्रालय से मिले इनपुट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने यह अहम फैसला लिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर न तो किसी खतरे का जिक्र किया गया है और न ही किसी राजनीतिक कारण की पुष्टि हुई है, लेकिन इसके बावजूद इस कदम को सामान्य प्रशासनिक निर्णय से कहीं ज्यादा अहम माना जा रहा है। वजह साफ है—शिवराज सिंह चौहान का नाम लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है।
दिल्ली से भोपाल तक बढ़ी चौकसी, सुरक्षा घेरे में और इजाफा
शिवराज सिंह चौहान पहले से ही जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा के दायरे में हैं, लेकिन अब उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और विस्तार दिया गया है। दिल्ली में उनके आवास से लेकर भोपाल स्थित 74 बंगला तक अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा में हुई इस बढ़ोतरी ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जब किसी बड़े नेता की सुरक्षा अचानक बढ़ाई जाती है, तो इसके पीछे सिर्फ सुरक्षा कारण ही नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक भूमिका भी जुड़ी हो सकती है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी और शिवराज का नाम—संयोग या संकेत?
बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर काफी समय से मंथन चल रहा है। मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है और पार्टी संगठन नए नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में शिवराज सिंह चौहान का नाम बार-बार सामने आना महज संयोग नहीं माना जा रहा। चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज न सिर्फ प्रशासनिक अनुभव रखते हैं, बल्कि संगठनात्मक राजनीति में भी उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता, जमीन से जुड़ाव और लंबे समय तक सत्ता व संगठन दोनों में काम करने का अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
खुद शिवराज का रुख—दावेदारी से दूरी, काम पर फोकस
इन तमाम अटकलों के बीच शिवराज सिंह चौहान सार्वजनिक मंचों पर बेहद संतुलित बयान देते नजर आते हैं। वे साफ तौर पर कहते हैं कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान कृषि मंत्रालय और किसानों से जुड़े मुद्दों पर है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की चर्चाओं पर वे न तो खुलकर हामी भरते हैं और न ही सिरे से खारिज करते हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि अक्सर बड़े पदों की दौड़ में वही नाम सबसे आगे होता है, जो खुद को इस दौड़ से अलग बताता है, लेकिन चर्चा के केंद्र में बना रहता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय—फैसला शीर्ष नेतृत्व के हाथ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवराज सिंह चौहान का नाम संभावित राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची में सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति से ही लिया जाएगा। बीजेपी में परंपरागत रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन व्यापक विचार-विमर्श के बाद किया जाता है, जिसमें क्षेत्रीय संतुलन, संगठन की जरूरत और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखा जाता है।
एमपी से तीसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की ओर कदम?
अगर शिवराज सिंह चौहान के नाम पर मुहर लगती है, तो वे मध्य प्रदेश से बीजेपी के तीसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो ग्वालियर से थे, 1980 में बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। इसके बाद धार के कुशाभाऊ ठाकरे ने 1998 से 2000 तक यह जिम्मेदारी संभाली। शिवराज के अध्यक्ष बनने की स्थिति में मध्य प्रदेश ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां से बीजेपी को सबसे ज्यादा राष्ट्रीय अध्यक्ष मिले होंगे। साथ ही, शिवराज देश के 10वें बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में इतिहास में दर्ज हो सकते हैं।
बीजेपी के अब तक के राष्ट्रीय अध्यक्ष—एक नजर में
बीजेपी के संगठनात्मक इतिहास पर नजर डालें तो अलग-अलग राज्यों से कई बड़े चेहरे इस पद को संभाल चुके हैं। लालकृष्ण आडवाणी (गुजरात), मुरली मनोहर जोशी (उत्तराखंड), बंगारु लक्ष्मण (आंध्र प्रदेश—अब तेलंगाना क्षेत्र), के. जाना कृष्णमूर्ति (तमिलनाडु), एम. वेंकैया नायडू (आंध्र प्रदेश), राजनाथ सिंह (उत्तर प्रदेश), नितिन गडकरी (महाराष्ट्र), अमित शाह (गुजरात) और जगत प्रकाश नड्डा (हिमाचल प्रदेश) इस सूची में शामिल हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगला नाम किसका होगा।
राजनीति के केंद्र में फिर शिवराज
सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद उठ रहे सवाल—क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है या किसी बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी का संकेत? क्या शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश से निकलकर अब दिल्ली की और भी बड़ी भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं? और क्या बीजेपी को जल्द नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है? इन सवालों के जवाब भले ही भविष्य के गर्भ में हों, लेकिन इतना साफ है कि शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। पार्टी में उनकी भूमिका आने वाले समय में और अहम हो सकती है, हालांकि बीजेपी की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।