उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और आस्था के विशेष क्षण का साक्षी बना। मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री महाकालेश्वर के लिए नवीन रजत द्वार स्थापित किए गए हैं। यह पावन कार्य कोलकाता निवासी एक श्रद्धालु भक्त द्वारा अपनी गहरी आस्था और समर्पण भाव के साथ संपन्न कराया गया, जिसने महाकाल भक्तों के बीच खास चर्चा और भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर दिया है।
चांदी से सुसज्जित भव्य द्वार
नवीन रजत द्वार लकड़ी के मजबूत ढांचे पर निर्मित किए गए हैं, जिन पर चांदी की आकर्षक परत चढ़ाई गई है। ये द्वार दो पल्लों के रूप में तैयार किए गए हैं, जिनमें बारीक नक्काशी और पारंपरिक शिल्पकला की झलक साफ दिखाई देती है। इन द्वारों के निर्माण में कुल लगभग 25 किलोग्राम शुद्ध चांदी का उपयोग किया गया है, जिससे इनकी भव्यता और दिव्यता और भी बढ़ गई है।
गर्भगृह की शोभा में हुआ अभूतपूर्व इजाफा
नए रजत द्वार स्थापित होने के बाद गर्भगृह की आभा और अधिक अलौकिक हो गई है। चांदी की चमक और कलात्मक बनावट के कारण अब दर्शन के समय भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति हो रही है। भक्तों का कहना है कि इन नए द्वारों से गर्भगृह की पवित्रता और गरिमा और भी निखरकर सामने आई है।
भक्ति, आस्था और परंपरा का सुंदर संगम
महाकालेश्वर मंदिर में दान और सेवा की परंपरा सदियों पुरानी रही है। इस नवीन रजत द्वार की स्थापना उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान महाकाल की सेवा में योगदान देते हैं। कोलकाता निवासी भक्त द्वारा किया गया यह समर्पण आने वाले वर्षों तक महाकाल भक्तों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ कार्य
रजत द्वार की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ की गई। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा और भगवान महाकाल के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर को अत्यंत सौभाग्यपूर्ण बताया और भगवान महाकाल से सुख-समृद्धि की कामना की।
महाकाल की नगरी में श्रद्धा का नया अध्याय
श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित यह नवीन रजत द्वार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच अटूट विश्वास का भी प्रतीक बन गए हैं। उज्जैन की महाकाल नगरी में यह घटना भक्ति और समर्पण के एक नए अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।