मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शासकीय सेवकों के हितों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने रिटायरमेंट के 20 साल बाद एक कर्मचारी को चतुर्थ वेतनमान का लाभ देने का आदेश जारी किया है। यह मामला उन कर्मचारियों के लिए नजीर बन सकता है जो लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
जस्टिस एमएस भट्टी की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने विभाग द्वारा दी गई दलीलों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी को उसके वाजिब हक से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही इसमें कितना भी समय क्यों न बीत गया हो।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता रामदयाल, जो जल संसाधन विभाग में कार्यरत थे, साल 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने वेतन विसंगतियों को लेकर विभाग के समक्ष कई बार आवेदन दिए थे। उनका मुख्य दावा चतुर्थ वेतनमान (Fourth Pay Scale) को लेकर था, जिसका लाभ उन्हें सेवाकाल के दौरान नहीं मिल पाया था।
विभाग ने उनकी मांगों को अनसुना कर दिया, जिसके बाद रामदयाल ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से अधिवक्ता सुधीर नायक ने पैरवी की। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति और सेवाकाल के रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि वे इस वेतनमान के हकदार थे।
विभाग की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता की मांग बहुत पुरानी है और अब इसमें देरी हो चुकी है। विभाग ने तकनीकी आधारों पर याचिका का विरोध किया। हालांकि, जस्टिस एमएस भट्टी ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने माना कि अगर कर्मचारी को उसके सेवाकाल के दौरान सही वेतनमान नहीं दिया गया, तो यह विभाग की गलती है। केवल देरी का हवाला देकर किसी कर्मचारी को उसके वित्तीय लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
तीन महीने में भुगतान का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में विभाग को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता रामदयाल को चतुर्थ वेतनमान का पूरा एरियर (बकाया राशि) दिया जाए। इसके लिए विभाग को तीन महीने का समय दिया गया है। साथ ही, पेंशन का पुनर्निर्धारण कर उसे भी संशोधित करने का आदेश दिया गया है।
यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है जो रिटायरमेंट के बाद भी अपनी वेतन विसंगतियों और एरियर के लिए अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। कोर्ट का यह सख्त रुख प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल खड़े करता है।