बिजली चोरी रोकने के लिए कंपनी का नया दांव, ‘वी मित्र’ ऐप पर शिकायत करने पर मिलेगा 50 हजार तक का इनाम

मध्य प्रदेश में बिजली चोरी की समस्या से निपटने के लिए अब तकनीक और आम जनता की भागीदारी का सहारा लिया जा रहा है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली चोरी की रोकथाम के लिए एक विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत ‘वी मित्र’ (V-Mitra) ऐप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति बिजली चोरी की शिकायत दर्ज करा सकता है। खास बात यह है कि सही सूचना देने वाले व्यक्ति को कंपनी की ओर से नकद इनाम दिया जाएगा।

कंपनी ने इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान रखा है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा दी गई सूचना सही पाई जाती है और कंपनी उस चोरी के मामले में राशि वसूलने में सफल होती है, तो सूचना देने वाले को वसूली गई राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। इस इनाम की अधिकतम सीमा 50,000 रुपये तय की गई है। यह कदम न केवल बिजली चोरी रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी सतर्क रहने के लिए प्रेरित करेगा।

पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त

अक्सर लोग पड़ोसी या मोहल्ले में हो रही बिजली चोरी की शिकायत करने से डरते हैं, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो जाए। इस समस्या का समाधान करते हुए कंपनी ने आश्वस्त किया है कि ‘वी मित्र’ ऐप के जरिए शिकायत करने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। शिकायतकर्ता का नाम, मोबाइल नंबर और पता किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इससे लोग बिना किसी भय के बिजली चोरी की जानकारी साझा कर सकेंगे।

कैसे करें ऐप का इस्तेमाल?

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ता को अपने स्मार्टफोन पर ‘उपाय’ (UPAY) ऐप या कंपनी की वेबसाइट का उपयोग करना होगा। वहां ‘वी मित्र’ योजना का विकल्प उपलब्ध है।

शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया:

  • सबसे पहले Google Play Store से ‘UPAY’ ऐप डाउनलोड करें या कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाएं।
  • ‘V-Mitra’ विकल्प का चयन करें।
  • वहां ‘New Informant Registration’ पर क्लिक करें।
  • अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त OTP के माध्यम से सत्यापन करें।
  • इसके बाद बिजली चोरी का विवरण, जैसे स्थान और संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी दर्ज करें।

पुरानी व्यवस्था में हुआ सुधार

इससे पहले भी बिजली चोरी की सूचना देने की व्यवस्था थी, लेकिन वह प्रक्रिया थोड़ी जटिल थी और लोगों को अपनी गोपनीयता को लेकर संशय बना रहता था। अक्सर लोग सीधे बिजली ऑफिस या फोन के जरिए सूचना देते थे, लेकिन उसका रिकॉर्ड और इनाम की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। अब ऐप आधारित सिस्टम होने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है। कंपनी का मानना है कि इस डिजिटल पहल से राजस्व के नुकसान में कमी आएगी और बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार होगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह योजना भोपाल, ग्वालियर समेत कंपनी के कार्यक्षेत्र वाले सभी 16 जिलों में लागू है। कंपनी ने अपील की है कि जागरूक नागरिक आगे आएं और बिजली चोरी रोकने में प्रशासन की मदद करें।