सिंहस्थ 2028 से पहले बदलेगा इंदौर एयरपोर्ट का स्वरूप, विकास योजनाओं पर चर्चा

इंदौर एयरपोर्ट को भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकसित करने के लिए सोमवार को एयरपोर्ट परिसर में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को हो रही मौजूदा परेशानियों का समाधान निकालना और एयरपोर्ट के दीर्घकालिक विकास की ठोस योजना तैयार करना रहा। चर्चा के दौरान एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने, यातायात व्यवस्था सुधारने और बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर विशेष फोकस किया गया।

दिल्ली से पहुंचे AAI के वरिष्ठ अधिकारी

बैठक में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के ऑपरेशन और प्लानिंग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली से विशेष रूप से इंदौर पहुंचे। उन्होंने एयरपोर्ट की वर्तमान स्थिति, चल रहे कार्यों और भविष्य की प्रस्तावित योजनाओं का मौके पर निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। इससे पहले नॉर्थ इंडिया इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की टीम भी एयरपोर्ट का दौरा कर चुकी है। बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, एयरपोर्ट प्रबंधन, एयरपोर्ट सलाहकार समिति के सदस्य और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद तेज हुई प्रक्रिया

यह बैठक हाल ही में नई दिल्ली में नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ हुई चर्चा के बाद आयोजित की गई। उस दौरान इंदौर एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव, पार्किंग की समस्या, सुरक्षा जांच, टर्मिनल की सीमित क्षमता और आने वाले वर्षों की चुनौतियों पर विस्तार से बातचीत हुई थी। मंत्री के निर्देशों के बाद AAI के अधिकारी इंदौर पहुंचे और जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन किया।

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर बनेगी योजना

बैठक में विशेष रूप से सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट से जुड़े दीर्घकालिक प्रोजेक्ट्स को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। एजेंडा के अनुसार मल्टी लेवल कार पार्किंग, प्री-एंबार्केशन सिक्योरिटी चेक प्वाइंट का विस्तार, ट्रैफिक जाम कम करने के लिए नए व्हीकुलर लेन, नया टर्मिनल भवन, प्रशासनिक भवन, रनवे विस्तार और पैरेलल टैक्सीवे जैसे प्रस्तावों पर गंभीर मंथन किया गया।

यात्री क्षमता बढ़ाने का मास्टर प्लान

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इंदौर एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता लगभग 40 लाख है। प्रस्तावित मास्टर प्लान के तहत पहले चरण में इसे बढ़ाकर 1 करोड़ यात्रियों तक और दूसरे चरण में करीब 2.5 करोड़ यात्रियों की क्षमता तक ले जाने की तैयारी है। इसके लिए लगभग 89 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह विस्तार बेहद जरूरी माना जा रहा है।

पार्किंग समस्या के समाधान पर जोर

बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान में एयरपोर्ट की पार्किंग पर अत्यधिक दबाव है, जिससे यात्रियों को प्रवेश और निकास में परेशानी होती है। इस समस्या से निपटने के लिए मल्टी लेवल कार पार्किंग को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। इससे न सिर्फ पार्किंग की समस्या कम होगी, बल्कि पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा जांच और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की योजना

सुरक्षा जांच व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पीक टाइम में लंबी कतारों को कम करने के लिए यह सुझाव सामने आया कि ऊपर और नीचे दोनों स्तरों पर मौजूद सिक्योरिटी गेट्स का समान रूप से उपयोग किया जाए। इससे यात्रियों का दबाव संतुलित होगा और अव्यवस्था कम होगी। इसके साथ ही रनवे को 2754 मीटर से बढ़ाकर 3500 मीटर करने, रडार सिस्टम लगाने, मेट्रो कनेक्टिविटी, अलग एंट्री-एग्जिट सिस्टम और एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

VIP मूवमेंट से आम यात्रियों को राहत देने पर विचार

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि वीआईपी मूवमेंट के कारण कई बार आम यात्रियों को असुविधा होती है। इसके समाधान के लिए वीआईपी मूवमेंट को अलग टर्मिनल से संचालित करने के विकल्प पर विचार किया गया। साथ ही कुछ कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी भी जताई गई, जिसमें एटीआर फ्लाइट के लिए पुराने टर्मिनल से संचालन और रनवे कारपेटिंग कार्य शामिल रहे। अधिकारियों को इन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

अगले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास

बैठक में स्पष्ट किया गया कि इंदौर एक तेजी से बढ़ता हुआ शहर है और यहां हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसलिए एयरपोर्ट का विकास केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न होकर आने वाले 25 वर्षों की मांग को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि बैठक में सामने आए सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नई उड़ानों और बेहतर सुविधाओं के सुझाव

एयरपोर्ट सलाहकार समिति की ओर से सूरत, कोची, गुवाहाटी और अमृतसर के लिए नई फ्लाइट शुरू करने का सुझाव दिया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने और एयरपोर्ट लाउंज की सुविधाओं को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। उम्मीद जताई गई कि इन प्रस्तावों पर अमल होने से इंदौर एयरपोर्ट यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक और आधुनिक बन सकेगा।