EOW की सख्त कार्रवाई, डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सोसायटी के पूर्व पदाधिकारियों पर FIR

इंदौर में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा करते हुए संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर गैर-सदस्यों और अपात्रों को भूखंड आवंटित किए गए, जिसमें पद का दुरुपयोग, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

इन पदाधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला

ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष श्रीकांत घण्टे (निवासी चन्द्रलोक कॉलोनी, इंदौर), तत्कालीन उपाध्यक्ष सुभाष दुबे (निवासी नंदानगर, वर्तमान पता संचार नगर, इंदौर) और हितग्राही ईसाई उर्फ सलीम पिता वली मोहम्मद (निवासी वैभव नगर, कनाडिया रोड) को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

सोसायटी के गठन से शुरू हुई जांच की कहानी

एफआईआर के अनुसार, डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था का गठन 20 जनवरी 1975 को किया गया था। संस्था का उद्देश्य आवासहीन सदस्यों को भूखंड उपलब्ध कराना था। लेकिन जांच में सामने आया कि इस उद्देश्य के विपरीत जाकर तत्कालीन पदाधिकारियों ने निजी लाभ के लिए नियमों का उल्लंघन किया।

गैर-सदस्यों को किया गया अवैध भूखंड आवंटन

जांच में यह पाया गया कि तत्कालीन अध्यक्ष श्रीकांत घण्टे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संस्था के गैर-सदस्य सलीम पिता वली मोहम्मद को संचार नगर एक्सटेंशन में आवासीय और व्यवसायिक भूखंड आवंटित कर दिए। इसमें 1500 वर्गफीट और 750 वर्गफीट के आवासीय भूखंड तथा 3500 वर्गफीट का व्यवसायिक भूखंड शामिल है, जो नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

परिवार को पहुंचाया गया अनुचित लाभ

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन उपाध्यक्ष सुभाष दुबे ने भी अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी पत्नी विद्यादेवी, बड़े भाई सत्यनारायण दुबे और अपने पिता स्वर्गीय मांगीलाल दुबे के नाम पर संचार नगर एक्सटेंशन में अलग-अलग 1500 वर्गफीट के भूखंड आवंटित कराए। इस तरह सहकारिता अधिनियम का उल्लंघन करते हुए एक ही परिवार के कई सदस्यों को अवैध रूप से लाभ पहुंचाया गया।

कूटरचित दस्तावेजों से बनाई गई फर्जी सदस्यता

जांच में यह भी उजागर हुआ कि गैर-सदस्य सलीम को संस्था का सदस्य दिखाने के लिए कूटरचित रसीदें, फर्जी सदस्यता क्रमांक और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर भूखंडों का आवंटन किया गया, जिससे कूटरचना, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के अपराध प्रमाणित होते हैं।

इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

ईओडब्ल्यू ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) व 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। एजेंसी का कहना है कि संस्था में नियम विरुद्ध और अवैध रूप से प्लॉट आवंटन से लाभान्वित हुए अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।