आईएएस संतोष वर्मा से जुड़े बहुचर्चित फर्जी आदेश मामले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोपियों को राहत देने वाले सेशन जज का तबादला कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के रजिस्ट्रार जनरल ने इंदौर जिला न्यायालय में पदस्थ सेशन जज प्रकाश कसेरा के तबादले का आदेश जारी किया है।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, जज प्रकाश कसेरा को अब इंदौर से हटाकर सीधी जिले की रामपुर सेशन कोर्ट में पदस्थ किया गया है। यह आदेश एक दिन पूर्व ही पारित किया गया है, जिसके बाद से न्यायिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2021 का है, जब इंदौर की एमजी रोड पुलिस ने आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ फर्जी न्यायिक आदेश तैयार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। आरोप है कि अपने पदोन्नति में लाभ लेने के लिए एक फर्जी अदालती आदेश तैयार करवाया गया था।
इस साजिश में इंदौर में पूर्व में पदस्थ रहे जज वीरेन्द्र सिंह रावत और उनकी कोर्ट की टाइपिस्ट नीतू सिंह को भी आरोपी बनाया गया था। पुलिस जांच में इन दोनों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।
जमानत देने के बाद सुर्खियों में आए थे जज
तबादला किए गए सेशन जज प्रकाश कसेरा उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने इस गंभीर मामले में आरोपी निलंबित जज वीरेन्द्र सिंह रावत को अग्रिम जमानत दे दी थी। इसके अलावा, मामले की सह-आरोपी टाइपिस्ट नीतू सिंह को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, रिमांड अवधि के दौरान ही 19 दिसंबर को जमानत मिल गई थी।
पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
इस मामले में पुलिस की जांच अभी भी जारी है। टाइपिस्ट नीतू सिंह की गिरफ्तारी के बाद एसीपी विनोद दीक्षित ने स्पष्ट किया था कि जांच में मुख्य आरोपी आईएएस संतोष वर्मा और निलंबित जज वीरेन्द्र सिंह रावत पुलिस का सहयोग नहीं कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि असहयोग को देखते हुए वे सख्त कदम उठाने की तैयारी में हैं। पुलिस अब इस आधार पर दोनों प्रमुख आरोपियों की जमानत निरस्त करवाने के लिए कोर्ट में विधिवत आवेदन प्रस्तुत करेगी। फिलहाल, जज के तबादले को इस केस के एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।