एमपी बोर्ड परीक्षा से पहले स्कूलों में शिक्षक कमी की मार, चुनाव ड्यूटी और सीसीएल से पढ़ाई बाधित

मध्य प्रदेश के भोपाल में आगामी बोर्ड परीक्षाओं से पहले कई सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षकों की कमी महसूस की जा रही है। चुनावी ड्यूटी, प्रशिक्षण कार्यक्रम और चाइल्ड केयर लीव (CCL) के चलते बड़ी संख्या में शिक्षक इन दिनों अनुपस्थित हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इससे कक्षा 10 और 12 के विद्यार्थियों की तैयारी पर असर पड़ रहा है।

प्रशासन द्वारा चुनाव कार्य के लिए शिक्षकों की तैनाती पहले से तय की गई थी, लेकिन बोर्ड परीक्षा के नजदीक आने से यह व्यवस्था स्कूलों के लिए चुनौती बन गई है। कई शिक्षकों ने व्यक्तिगत कारणों या अवकाश के लिए आवेदन भी किया है, जिससे संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव है।

परीक्षा से पहले दबाव

स्कूलों में जनवरी और फरवरी में प्री-बोर्ड तथा रिवीजन कक्षाएं चलती हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण कई विषयों की कक्षाएं स्थगित करनी पड़ी हैं। प्रबंधन अस्थायी रूप से उपलब्ध शिक्षकों से अतिरिक्त पीरियड लेकर कमी पूरी करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह समाधान सीमित है।

प्रशासनिक पृष्ठभूमि

चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सरकारी कर्मचारियों, जिनमें शिक्षक भी शामिल हैं, को चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है। पूर्व में भी 2018 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान इसी तरह परीक्षा से पहले शिक्षकों की कमी की स्थिति बनी थी। उस समय भी स्कूलों ने वैकल्पिक प्रबंध किए थे।

प्रबंधन और अभिभावकों की चिंता

अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के समय विषय विशेषज्ञों की अनुपस्थिति बच्चों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। कई स्कूलों ने ऑनलाइन माध्यम से रिवीजन क्लास शुरू करने का प्रयास किया है, ताकि विद्यार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन मिल सके।

शिक्षा विभाग ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए संबंधित स्कूलों से उपलब्ध शिक्षकों की सूची मांगी है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त व्यवस्था करने की बात कही है।

आगामी दिनों में चुनाव कार्य और परीक्षाओं के बीच संतुलन बनाना प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।