सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में मूंग दाल का हलवा एक पारंपरिक व्यंजन के रूप में खास जगह रखता है। यह व्यंजन खासतौर पर त्योहारों और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर परोसा जाता है। मूंग दाल को भिगोकर, पीसकर और घी में धीमी आंच पर भूनने की प्रक्रिया इसका असली स्वाद देती है।
पारंपरिक रेसिपी के अनुसार, हलवे के लिए धुली मूंग दाल को 4-5 घंटे पानी में भिगोया जाता है। इसके बाद इसे बिना पानी डाले पीसकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट को शुद्ध घी में सुनहरा होने तक भूनना हलवे की सबसे अहम कड़ी है।
सामग्री और विधि
हलवा बनाने के लिए मूंग दाल, शुद्ध घी, दूध, चीनी और इलायची पाउडर की आवश्यकता होती है। भुनी हुई दाल में दूध और चीनी डालकर लगातार चलाते हुए मिश्रण को गाढ़ा किया जाता है। अंत में इलायची पाउडर और काजू-बादाम जैसे मेवे डालकर सजाया जाता है।
स्वाद और परोसने के तरीके
मूंग दाल का हलवा गर्मागर्म परोसने पर सबसे अच्छा लगता है। इसे अक्सर शादी समारोहों में बड़े पैन में तैयार कर मेहमानों को दिया जाता है। सर्दियों में यह हलवा शरीर को ऊर्जा और गर्मी देने में भी मदद करता है।
पिछले वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इसकी रेसिपी और टिप्स खूब साझा किए गए हैं। कई शेफ्स ने बताया है कि मूंग दाल को लंबे समय तक भूनने से हलवे का रंग और खुशबू दोनों बेहतर होती हैं।
इस पारंपरिक मिठाई की लोकप्रियता आज भी बरकरार है और यह भारतीय रसोई की शान मानी जाती है।