शिप्रा तट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा अध्यक्ष व मंत्रियों के साथ सुना प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ 129वां एपिसोड

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिप्रा के पावन तट पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड का सामूहिक रूप से श्रवण किया। इस अवसर पर आध्यात्मिकता, जनसंवाद और राष्ट्रचिंतन का अनूठा संगम देखने को मिला। शांत वातावरण, नदी की कलकल ध्वनि और जनभागीदारी की उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक और प्रेरक बना दिया। मुख्यमंत्री ने इस क्षण को जनसेवा और राष्ट्रसेवा से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देश के करोड़ों नागरिकों को सकारात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का माध्यम बन चुकी है।

इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र तोमर, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और बैतूल विधायक श्री हेमन्त खंडेलवाल भी उपस्थित रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के विचारों को गंभीरता और एकाग्रता के साथ सुना। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री के संदेशों को सभी ने आत्मसात किया और इन्हें जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प को दोहराया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम नागरिक की आवाज़ को देश की नीतियों और दिशा से जोड़ने वाला सशक्त मंच है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विचारों को समाज के हर वर्ग के लिए मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि इससे युवाओं को प्रेरणा, किसानों को नवाचार और समाज को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। शिप्रा जैसी पवित्र नदी के तट पर इस कार्यक्रम का श्रवण करना अपने आप में एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव रहा।

विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र तोमर ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देश की एकता, संस्कृति और मूल्यों को मजबूत करने वाला कार्यक्रम है। वहीं जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन से जुड़े संदेशों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। बैतूल विधायक श्री हेमन्त खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के विचार समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति रखते हैं और इन्हें जमीनी स्तर तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों ने शिप्रा नदी की स्वच्छता, संरक्षण और जनजागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह आयोजन न केवल ‘मन की बात’ के संदेशों को सुनने का अवसर बना, बल्कि जनप्रतिनिधियों और समाज के बीच संवाद, संवेदनशीलता और सेवा भाव को और मजबूत करने वाला क्षण भी साबित हुआ।