एमपी उच्च शिक्षा में बड़े सुधार, नए सत्र से कॉलेजों में सख्त अटेंडेंस नियम, फर्स्ट ईयर में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ अनिवार्य, अतिथि विद्वान बने रहेंगे

भोपाल में आयोजित विभागीय बैठक में मध्य प्रदेश के उच्च, तकनीकी और आयुष शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मिशन 2028 के अंतर्गत दो वर्षीय कार्ययोजना की शुरुआत की घोषणा की। इस योजना के तहत शिक्षा के सभी स्तरों पर गुणवत्ता सुधार, आधुनिक तकनीक का उपयोग और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि राज्य में शिक्षा ढांचे को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए यह योजना बनाई गई है। इसमें उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान व नवाचार को बढ़ावा देने, तकनीकी शिक्षा में उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम लागू करने और आयुष शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधार करने के प्रावधान होंगे।

पिछले वर्षों में भी राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई सुधारात्मक कदम उठाए थे, जिनमें नई विश्वविद्यालयों की स्थापना और डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म का विस्तार शामिल था। मिशन 2028 इन प्रयासों को दीर्घकालिक दिशा देगा।

मिशन 2028 के मुख्य लक्ष्य

योजना के तहत उच्च शिक्षा में अनुसंधान सुविधाओं को बढ़ाना, तकनीकी संस्थानों में प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण और आयुष शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना प्रमुख लक्ष्य हैं। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

कार्यान्वयन की रूपरेखा

दो वर्षीय प्रारंभिक चरण में विभागीय समितियां शिक्षा संस्थानों का आकलन करेंगी और आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेंगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अधोसंरचना विकास, पाठ्यक्रम संशोधन और शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

मंत्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार मानती है, और मिशन 2028 इसी दृष्टिकोण का हिस्सा है।