Jaipur News : अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर जारी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने पूर्व आदेश पर रोक लगा दी। 20 नवंबर 2023 को अदालत ने 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों पर खनन की अनुमति दी थी, लेकिन अब इस अनुमति को 21 जनवरी 2026 तक स्थगित कर दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एजी मसीह की अवकाश पीठ ने कहा कि मौजूदा विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और उस पर हुई अदालत की टिप्पणियों को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा।
नई विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव
अदालत ने स्पष्ट किया कि खनन से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी जो मौजूदा रिपोर्ट का विश्लेषण कर आवश्यक सुझाव देगी। केंद्र सरकार और राजस्थान, गुजरात, दिल्ली व हरियाणा से इस पर जवाब मांगा गया है।
गलतफहमियों पर चिंता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आदेशों और सरकारी भूमिका को लेकर कई गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं को दूर करने के लिए पहले विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी।
सीजेआई सूर्यकांत ने भी माना कि रिपोर्ट और टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला जा रहा है, जिसे स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
परिभाषा पर विवाद
मामले में 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला मानने की नई परिभाषा का विरोध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है और सुनवाई जारी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने स्थगन आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को जनता की इच्छा समझनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि चार राज्यों और देशभर की जनता इस आंदोलन में शामिल है और विरोध प्रदर्शनों में भाग ले रही है।
“हमें खुशी है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी किया। आशा है सरकार जनता की इच्छा को समझेगी।” — अशोक गहलोत
अगली सुनवाई में समिति गठन और रिपोर्ट के मूल्यांकन पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।