इंदौर में PCC चीफ बोले- ‘मैं तो वनवास भोग रहा हूं’, BJP ने बताया सत्ता से दूर होने का परिणाम

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी सोमवार को इंदौर प्रवास पर रहे। इस दौरान कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि वह खुद “वनवास भुगत रहे हैं।” उनका यह बयान सामने आते ही प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

भाजपा का पलटवार, कांग्रेस नेतृत्व पर तंज

जीतू पटवारी के बयान पर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के नेता सत्ता से बाहर होते हैं तो उन्हें हर स्थिति वनवास जैसी लगने लगती है। मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा कि जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनते समय सत्ता की मलाई नजर आ रही थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को ही जीतू पटवारी ने “वनवास” पर भेज दिया है और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता उनकी कार्यशैली से नाराज होकर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।

सत्ता से दूरी को कांग्रेस बताती है वनवास

भाजपा नेता सुमित मिश्रा ने आगे कहा कि कांग्रेस जब सत्ता से दूर होकर जनता के बीच जाने को मजबूर होती है, तो उसे यही स्थिति वनवास जैसी लगती है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह पहले नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं, कहीं ऐसा न हो कि पूरी कांग्रेस को ही नर्मदा परिक्रमा पर निकलना पड़े।

दिग्विजय सिंह का बयान और सोशल मीडिया पोस्ट

इस पूरे विवाद के बीच दिग्विजय सिंह का एक बयान भी सुर्खियों में आ गया। उन्होंने 27 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने आरएसएस और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की सराहना करते हुए लिखा कि किस तरह आरएसएस का एक जमीनी स्वयंसेवक और भाजपा का कार्यकर्ता आगे बढ़कर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना। उन्होंने इसे संगठन की ताकत का उदाहरण बताया।

कांग्रेस में विरोध, नेताओं ने जताई नाराजगी

दिग्विजय सिंह के इस बयान पर कांग्रेस के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे। पूर्व राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी और कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इस बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके बयान से पार्टी की वैचारिक लड़ाई कमजोर हुई है और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है।

निधि चतुर्वेदी के आरोप

निधि चतुर्वेदी ने लिखा कि दिग्विजय सिंह के बयान ने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम कार्यकर्ताओं का अपमान किया है, जो आरएसएस और भाजपा की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ नेता होने के नाते दिग्विजय सिंह की जिम्मेदारी थी कि वे पार्टी की वैचारिक लड़ाई को मजबूत करते, न कि विपक्ष की तारीफ कर कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराते। उन्होंने इसे पार्टी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया।

भाजपा का समर्थन, विजयवर्गीय ने की सराहना

जहां कांग्रेस में इस बयान को लेकर नाराजगी है, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खुलकर दिग्विजय सिंह के समर्थन में आ गए हैं। विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सच कहने का साहस हर किसी में नहीं होता। उन्होंने कहा कि आरएसएस की तारीफ कर दिग्विजय सिंह ने साहस का परिचय दिया है।

कैलाश विजयवर्गीय ने आगे लिखा कि भले ही इस बयान से दिल्ली दरबार में दिग्विजय सिंह के अंक कम हुए हों, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के पुराने नेताओं की उस परंपरा को आगे बढ़ाया है, जिसमें सच कहने की हिम्मत होती थी। उनके मुताबिक यही लोकतंत्र की असली खूबसूरती है।