हम सब ने यह ठाना है डेंगू, मलेरिया मिटाना है, इंदौर में मच्छरजनित रोगों में आयी कमी

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ इंदौर ने इस वर्ष उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। शासन-प्रशासन की सतत कोशिशों और नागरिकों की जागरूक भागीदारी के चलते शहर में डेंगू के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछले वर्ष डेंगू के करीब 550 प्रकरण सामने आए थे, वहीं इस साल यह संख्या घटकर केवल 65 रह गई। मलेरिया के कुल 11 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से अधिकांश मामलों की माइग्रेशन हिस्ट्री महाराष्ट्र से जुड़ी पाई गई।

‘धन्यवाद इंदौर’ कार्यक्रम के माध्यम से जताया आभार

इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के संयुक्त तत्वाधान में “धन्यवाद इंदौर” कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला मलेरिया अधिकारी रश्मि शर्मा दुबे ने बताया कि इस सफलता के पीछे केवल प्रशासनिक प्रयास ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और एंटोमोलॉजिकल कारण भी रहे हैं। वर्षाकाल के पैटर्न में बदलाव, शीतकाल का देर से आना और वातावरण में नमी की स्थिति में परिवर्तन के कारण भी इस वर्ष मच्छरों की संख्या और उनसे होने वाली बीमारियों में कमी आई।

घर-घर सर्वे और लार्वा विनष्टीकरण से मिली मजबूती

जनवरी से दिसंबर तक 1,21,267 घरों में लार्वा सर्वे किया गया। इस दौरान 6,26,714 कंटेनरों की जांच हुई, जिनमें से 3,073 कंटेनरों में लार्वा पाया गया। इन सभी को तत्काल नष्ट किया गया और संबंधित परिवारों को मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए जागरूक किया गया। इस निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई ने बीमारियों पर नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई।

नगर निगम की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम में महापौर प्रतिनिधि भारत पारिख ने कहा कि इंदौर नगर निगम नागरिक स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित फॉगिंग और दवा छिड़काव किया गया। नगर निगम और जिला मलेरिया कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय से अभियान को मजबूती मिली। इस वर्ष शहर को नई फॉगिंग मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे आगामी वर्षों में भी डेंगू और मलेरिया पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलेगी।

प्रदेश स्तर पर भी दिखी कमी, लेकिन सतर्कता जरूरी

राज्य कार्यक्रम अधिकारी हिमांशु जायसवाल ने बताया कि इस वर्ष पूरे प्रदेश में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि डेंगू वायरस हर तीन वर्ष में दोबारा सक्रिय होकर महामारी का रूप ले सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को हर परिस्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

निःशुल्क जांच और उपचार की व्यवस्था

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हासनी ने बताया कि शासन स्तर से प्राप्त स्क्वाड और जिला मलेरिया कार्यालय के स्टाफ ने नगर निगम के साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम किया। जहां भी डेंगू या मलेरिया की सूचना मिली, वहां तुरंत लार्वा सर्वे, लार्वा विनष्टीकरण और फीवर सर्वे किया गया। सभी शासकीय अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और मरीजों को निःशुल्क जांच व उपचार प्रदान किया जा रहा है।

सामुदायिक सहभागिता से मिली सफलता

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के सहयोग से संचालित एम्बेड परियोजना–फैमिली हेल्थ इंडिया, इंदौर के अवधेश सिंह ने बताया कि उनकी टीम के 12 नियमित और 150 अनियमित कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया और लार्वा नष्ट करने में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से शहर की मलीन बस्तियों में मच्छर रोधी गतिविधियां संचालित की गईं। इस अवसर पर मानव श्रृंखला बनाई गई और गांधी हॉल से रीगल चौराहा तक जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें नर्सिंग छात्राओं सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया।