बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ी क्षति: पूर्व PM खालिदा जिया का दुखद निधन

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की दिग्गज नेता बेगम खालिदा जिया अब हमारे बीच नहीं रहीं। 80 वर्षीय खालिदा जिया ने मंगलवार सुबह करीब 6 बजे ढाका के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

वे पिछले 20 दिनों से वेंटिलेटर पर थीं और लंबे समय से लिवर, किडनी और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से पूरे बांग्लादेश में शोक की लहर दौड़ गई है।

वेंटिलेटर पर रहते हुए भी दाखिल किया था नामांकन

हैरान कर देने वाली बात यह है कि निधन से ठीक एक दिन पहले यानी सोमवार (29 दिसंबर) को खालिदा जिया ने बोगुरा-7 सीट से अपना चुनावी नामांकन दाखिल किया था। हालाकि उस समय भी उनकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन पार्टी ने उनकी राजनीतिक विरासत और समर्थकों की भावनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया था।

बोगुरा-7 वही सीट है जहां उनके पति और पार्टी संस्थापक जियाउर रहमान का पैतृक घर है और खालिदा यहां से तीन बार (1991, 1996, 2001) चुनाव जीत चुकी थीं।

एक संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन का सफ

खालिदा जिया का जन्म 1945 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी (अब पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था। उन्हें घर में प्यार से ‘पुतुल’ बुलाया जाता था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिनाजपुर में हुई। 1960 में उन्होंने सेना के अधिकारी जियाउर रहमान से विवाह किया, जो बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने।

1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने न केवल पार्टी को संभाला, बल्कि तानाशाही के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई। 1991 में वे बांग्लादेश की पहली और मुस्लिम जगत की दूसरी महिला प्रधानमंत्री बनीं।

वैश्विक नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

खालिदा जिया के निधन पर दुनिया भर के नेताओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं:

  • पीएम नरेंद्र मोदी (भारत): प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें एक ऐसी नेता बताया जिन्होंने राजनीति में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने 2015 की ढाका मुलाकात को याद करते हुए कहा कि भारत इस दुख की घड़ी में बांग्लादेश के साथ है।

  • मोहम्मद यूनुस (अंतरिम प्रमुख, बांग्लादेश): उन्होंने कहा कि देश ने लोकतांत्रिक आंदोलन का एक बड़ा प्रतीक खो दिया है। जिया सिर्फ नेता नहीं, बल्कि संघर्ष की मार्गदर्शक थीं।

  • शहबाज शरीफ (पीएम, पाकिस्तान): उन्होंने खालिदा जिया को पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाली नेता बताया और उनके योगदान की सराहना की।

स्वास्थ्य चुनौतियों और पारिवारिक संघर्ष का संक्षिप्त विवरण

श्रेणी विवरण
मुख्य बीमारियां लिवर सिरोसिस, किडनी फेलियर, डायबिटीज, गठिया और सीने में इन्फेक्शन।
पारिवारिक स्थिति पति जियाउर रहमान (निधन 1981), छोटे बेटे अराफात रहमान (निधन 2015)।
उत्तराधिकारी बड़े बेटे तारिक रहमान, जो वर्तमान में BNP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

अंतिम विदाई और राजनीतिक विरासत

खालिदा जिया का जाना बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर गया है। वे दो बार (1991-96 और 2001-06) प्रधानमंत्री रहीं। उनके कार्यकाल के दौरान शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया था।

भ्रष्टाचार के आरोपों और जेल की सजा के बावजूद, उनकी लोकप्रियता में कभी कमी नहीं आई। उनके बड़े बेटे तारिक रहमान, जो सालों से लंदन में निर्वासन में थे, उनके अंतिम समय में साथ रहने के लिए 25 दिसंबर को ही ढाका लौटे हैं।

बांग्लादेश सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक की घोषणा की है। उनके समर्थकों का मानना है कि भले ही वे शारीरिक रूप से चली गई हों, लेकिन ‘पुतुल’ की राजनीतिक सोच और लोकतंत्र के लिए उनका संघर्ष हमेशा जिंदा रहेगा।