इंदौर पुलिस की ‘खास’ मेहमाननवाजी: जश्न में डूबे हुड़दंगियों के लिए चेतावनी -‘आएंगे गाड़ी से, जाएंगे पैदल’

Indore News : नए साल के जश्न को लेकर जहाँ शहर के होटलों और पबों में तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने भी हुड़दंगियों और नशे में वाहन चलाने वालों के स्वागत के लिए एक ‘विशेष’ योजना तैयार की है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पुलिस के एक अनोखे पोस्टर ने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को पुलिस का ‘मेहमान’ बनना पड़ सकता है।

पोस्टर में छिपा कड़ा संदेश

ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी इस क्रिएटिव पोस्टर में लिखा है: “कोशिश करें, आप हमारे मेहमान न बनें।” पुलिस ने मजाकिया लेकिन कड़े लहजे में संदेश दिया है कि जो लोग नशे में वाहन चलाएंगे, तेज रफ्तार से गाड़ी दौड़ाएंगे या सड़कों पर स्टंटबाजी करेंगे, उनके लिए पुलिस स्टेशन के दरवाजे खुले हैं। पोस्टर की सबसे चर्चित लाइन है— “आप आएंगे वाहन से, लेकिन जाएंगे पैदल।” इसका अर्थ साफ है कि पकड़े जाने पर पुलिस न केवल चालान बनाएगी, बल्कि वाहन भी जब्त कर लेगी।

मैदान में होंगे 500 से ज्यादा जवान

31 दिसंबर की रात सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए इंदौर पुलिस के 500 से अधिक जवान सड़कों पर तैनात रहेंगे। शहर के प्रमुख चौराहों के साथ-साथ बाहरी इलाकों (एग्जिट पॉइंट्स) पर भी सख्त चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। विशेष रूप से ब्रीथ एनालाइजर के जरिए शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच की जाएगी।

सुरक्षित जश्न की अपील

पुलिस विभाग का मुख्य उद्देश्य उत्सव के दौरान होने वाले हादसों को रोकना है। अक्सर देखा गया है कि नववर्ष की रात शराब के नशे में लोग तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं, जिससे न केवल उनकी बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि:

  • अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ नए साल का स्वागत करें।

  • नशे की हालत में वाहन बिल्कुल न चलाएं; कैब या ड्राइवर का उपयोग करें।

  • सड़कों पर स्टंटबाजी और शोर-शराबे से बचें।

निष्कर्ष: इंदौर पुलिस की इस रचनात्मक चेतावनी का उद्देश्य युवाओं को जागरूक करना है। पुलिस का कहना है कि वे किसी के जश्न में बाधा नहीं डालना चाहते, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। तो इस 31 दिसंबर, सुरक्षित रहें और सुनिश्चित करें कि आपको पुलिस की ‘मेहमाननवाजी’ न स्वीकारनी पड़े।