Indore News : मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय भीषण जल संकट और स्वास्थ्य आपातकाल से जूझ रहा है। क्षेत्र में पाइपलाइन के जरिए पहुंचे दूषित पानी ने सैकड़ों लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया है।
स्थिति का जायजा लेने पहुंचे इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने आधिकारिक तौर पर अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 100 से अधिक लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। उनका इलाज नि:शुल्क किया जा रहा है। साथ ही क्षेत्र में शुद्द पानी की व्यवस्था की जा रही है।
आंकड़ों में उलझा प्रशासन और राजनेता
इस त्रासदी में मौतों की संख्या को लेकर भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहाँ कलेक्टर शिवम वर्मा 4 मौतों की बात कह रहे हैं, वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया को 7 मौतों की जानकारी दी थी। दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि अब तक 13 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रशासन इन मौतों को अन्य गंभीर बीमारियों से जोड़कर देख रहा है, जबकि परिजन सीधे तौर पर गंदे पानी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
कलेक्टर शिवम वर्मा ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों का हाल जाना और निर्देश दिए कि सभी का इलाज नि:शुल्क और प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। स्वास्थ्य विभाग की 30 से अधिक टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं। जांच में सामने आया है कि मुख्य जलापूर्ति लाइन में लीकेज होने के कारण सीवरेज का पानी नलों में मिल गया, जो इस बीमारी का प्रमुख कारण बना।
मुख्यमंत्री का कड़ा एक्शन: अधिकारी निलंबित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम के जोनल अधिकारी (जोन 4), सहायक यंत्री और पीएचई (PHE) के प्रभारी सहायक यंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, मृतक परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।