इंदौर शहर की विकास यात्रा वर्ष 2026 में भी बिना रुके आगे बढ़ती रहेगी। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) लगातार शहर को सुनियोजित, आधुनिक और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में नए आयाम जोड़ रहा है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालिक अधिकारी डॉ. परिक्षित झाड़े के अनुसार, बीते वर्ष किए गए कार्य और आगामी योजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि इंदौर को विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
2025 में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के बड़े काम पूरे
वर्ष 2025 में इंदौर विकास प्राधिकरण ने शहर के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण नगरीय अधोसंरचना परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया। यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संत श्री सेवालाल जी महाराज फ्लायओवर का निर्माण किया गया, जिसकी लंबाई 610 मीटर और चौड़ाई 24 मीटर है। यह फ्लायओवर प्रतिदिन करीब 2 लाख वाहनों की सुगम आवाजाही में सहायक है।
इसके अलावा भंवरकुआं फ्लायओवर, खजराना स्थित श्री गणेश सेतु और लवकुश फ्लायओवर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे कर कई प्रमुख चौराहों को सिग्नल मुक्त किया गया। साथ ही लगभग 87 किलोमीटर मास्टर प्लान सड़कों का निर्माण कार्य भी किया गया, जिससे शहर के अलग-अलग हिस्सों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई।
पर्यावरण और सुरक्षा का भी रखा गया ध्यान
इन सभी फ्लायओवर परियोजनाओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। 45 से 65 मीटर के ऑब्लिगेटरी स्पैन में स्टील गर्डर, सीस्मिक ज़ोन-3 के अनुरूप भूकंपरोधी डिजाइन, सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। निर्माण के दौरान बाधित हुए लगभग 2000 पेड़ों के बदले नए वृक्ष लगाए गए और 1400 से अधिक पौधों का रोपण किया गया, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके।
आधुनिक बस टर्मिनल से बदली परिवहन व्यवस्था
शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एमआर-10 पर श्री टंट्या मामा भील अंतरराष्ट्रीय बस टर्मिनल विकसित किया गया। 5.82 हेक्टेयर क्षेत्र में 100.60 करोड़ रुपये की लागत से बने इस टर्मिनल की क्षमता 24 घंटे में करीब 1400 बसों के संचालन की है। पूरी तरह वातानुकूलित भवन, सीसीटीवी निगरानी, अंडरग्राउंड पार्किंग, रेस्टोरेंट, दुकानें, कार्यालय और मेट्रो से सीधी कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं इसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब बनाती हैं। यह परियोजना 15 अप्रैल 2025 को पूरी की गई।
शिक्षा और सामाजिक सरोकारों पर विशेष फोकस
शिक्षा के क्षेत्र में भी IDA ने महत्वपूर्ण पहल की है। सांदीपनी विद्यालय (सीएम राइज स्कूल) के अंतर्गत नंदानगर, शिवनगर और पालकांकरिया क्षेत्रों में आधुनिक स्कूल परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं की भौतिक प्रगति 95 प्रतिशत से अधिक है और इनके मार्च 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है।
सामाजिक कल्याण के तहत स्नेह धाम परियोजना को भी विकसित किया गया है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंदों के लिए आवासीय सुविधाएं, चिकित्सा कक्ष, फिजियोथेरेपी, डायनिंग हॉल और एक्टिविटी एरिया जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
सांस्कृतिक विरासत और जल संरक्षण को भी मिला महत्व
जल संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में ग्राम कनाड़िया स्थित लगभग 250 वर्ष पुरानी अहिल्यामाता बावड़ी का जीर्णोद्धार किया गया। गंगा जल संवर्धन मिशन के तहत की गई इस पहल में बावड़ी का सुदृढ़ीकरण, जल पुनर्भरण व्यवस्था और देवी अहिल्या की प्रतिमा की स्थापना की गई, जिसका लोकार्पण मई 2025 में हुआ।
2026 में मेगा प्रोजेक्ट्स से बदलेगी शहर की तस्वीर
वर्ष 2026 में इंदौर विकास प्राधिकरण की भूमिका और भी अहम होने वाली है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ प्राधिकरण को विकास का प्रमुख सारथी माना जा रहा है। आगामी वर्ष में मास्टर प्लान के तहत नई सड़कें, नगर विकास योजनाएं और मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा।
टीपीएस-1, 3, 4, 5, 8, 9 और 10 सहित सात नगर विकास योजनाओं के माध्यम से सड़क निर्माण, गार्डन विकास और राजस्व वृद्धि के जरिए शहरी ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।
सड़क, ब्रिज और ट्रैफिक सुधार पर जोर
एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़क परियोजनाएं शहर की कनेक्टिविटी को नई मजबूती देंगी। एमआर-12 पर रिवर ब्रिज और रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण को भी अगले वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही आवश्यक स्थानों पर नए फ्लायओवर और चौराहों के उन्नयन से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
कन्वेंशन सेंटर, स्टार्टअप पार्क और नई पहचान
इंदौर को अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का केंद्र बनाने के लिए 1,800 करोड़ रुपये की लागत से कन्वेंशन-कम-एग्जीबिशन सेंटर विकसित किया जा रहा है। वहीं सुपर कॉरिडोर पर प्रस्तावित स्टार्टअप पार्क और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। मेघदूत गार्डन के पास मनोरंजन परियोजना और विजय नगर चौराहे पर मल्टी मॉड्यूलर स्टेशन जैसी योजनाएं भी शहर को नई पहचान देंगी।
डिजिटलाइजेशन से बढ़ेगी पारदर्शिता
इंदौर विकास प्राधिकरण ने अपनी पूरी कार्यप्रणाली को डिजिटल बनाने का भी लक्ष्य तय किया है। फाइल डिजिटलीकरण, लीज नवीनीकरण, नामांतरण जैसी सेवाओं को ऑनलाइन किया जाएगा। 1 जनवरी से लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों के काम समय पर पूरे हो सकेंगे।
भविष्य की स्मार्ट सिटी बनने की ओर इंदौर
इन सभी योजनाओं और परियोजनाओं के पूरा होने से इंदौर की कनेक्टिविटी, आर्थिक प्रगति, रोजगार अवसर और शहरी जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। आने वाले वर्षों में इंदौर एक आधुनिक, स्मार्ट और भविष्य-उन्मुख शहर के रूप में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार नजर आ रहा है।