इंदौर दूषित जल त्रासदी: गंदा पानी पीने से 13 मौतें, मामले पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाला इंदौर इन दिनों एक दर्दनाक सच्चाई से रूबरू है। भागीरथपुरा क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन हालात ऐसे बने कि पूरा इलाका मानो फूट-फूट कर रो पड़ा। नगर निगम की मेन लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में करीब 10–12 दिन पहले हुए लीकेज ने ऐसा ज़हर घोला कि शौचालयों और आसपास की फैक्ट्रियों का गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंचता रहा। इसी दूषित पानी को पीकर सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए। इलाज के अभाव और देरी ने हालात को और भयावह बना दिया। अब तक मौतों का आंकड़ा 8 से बढ़कर 13 हो चुका है, जबकि करीब 300 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।

हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, दो दिन में रिपोर्ट तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस त्रासदी पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इंदौर प्रशासन से दो दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह साफ कहा गया है कि सभी पीड़ितों को निशुल्क इलाज मुहैया कराया जाए। हाईकोर्ट की दखल के बाद प्रशासन में हलचल तो तेज हुई है, लेकिन सवाल यही है कि क्या यह कदम समय रहते उठाए जा सकते थे?

एक मां की गलती नहीं, सिस्टम की चूक से बुझ गई मासूम की सांसें

भागीरथपुरा में सबसे दिल दहला देने वाली कहानी 6 माह के अव्यान साहू की है। मां ने रोज़ की तरह दूध में पानी मिलाकर बच्चे को पिलाया, लेकिन उसे क्या पता था कि वह पानी मौत बनकर उसके कलेजे के टुकड़े को छीन लेगा। उल्टी-दस्त शुरू हुए और हालत बिगड़ती चली गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम की सांसें थम गईं। बुधवार को ही 5 और मौतों की पुष्टि हुई, जिनमें अव्यान साहू के साथ जीवन बरेडे (80), अशोक पवार, शंकर भाया और सुमित्रा देवी शामिल हैं।

शादी के 11 साल बाद मिला बेटा, 6 माह में छिन गया

भागीरथपुरा सब्जी मंडी के पास रहने वाले सुनील साहू की आंखों में आज भी सवाल और बेबसी है। उनकी शादी 2014 में हुई थी। एक 10 साल की बेटी के बाद 11 साल के इंतजार में अव्यान का जन्म हुआ। मां साधना की कांपती आवाज़ में दर्द छलक आता है—“दस्त-उल्टी होने पर निजी क्लीनिक ले गए, दवा दी गई। 29 दिसंबर की रात वह लगातार रोता रहा। अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही सब खत्म हो गया।” परिवार का कहना है कि कई दिनों से नलों में गंदा पानी आ रहा था, शिकायतें भी हुईं, पर किसी ने नहीं सुनी।

बुजुर्ग पिता की मौत, पूरा परिवार बीमार

आनंद बरेडे ने बताया कि 10 दिन पहले पानी की मेन टंकी में दवा डाली गई थी, लेकिन हालात सुधरे नहीं। 18 दिसंबर को उनके पिता जीवन बरेडे की तबीयत बिगड़ी। अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 28 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य भी उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। इसी तरह अशोक पवार की 25 दिसंबर को मौत हो गई। बेटे रवि के मुताबिक तीन दिन तक बीमारी से जूझने के बाद पिता जिंदगी की जंग हार गए।

बिहार से मिलने आई मां, यहीं टूट गई सांसों की डोर

इमलीगली निवासी शंकर भाया (70) की 31 दिसंबर को क्लॉथ मार्केट अस्पताल में मौत हो गई। वहीं बिहार से बेटे से मिलने भागीरथपुरा आई सुमित्रा देवी (50) की 21 दिसंबर को उल्टी-दस्त से जान चली गई। ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों की उजड़ी हुई दुनिया हैं, जिनके लिए हर दिन अब एक सवाल बन गया है।

स्वास्थ्य अमला, रेफर की दौड़ और राजनीतिक हलचल

भागीरथपुरा में स्वास्थ्य विभाग की टीमें जांच करती रहीं। देर शाम तक 38 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 10 की हालत गंभीर होने पर रेफर किया गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पीड़ितों के मुफ्त इलाज, मुआवजा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कांग्रेस की जांच समिति, 5 जनवरी को सौंपेगी रिपोर्ट

मामले ने सियासी तूल भी पकड़ लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 5 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इसमें पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, जयवर्धन सिंह, भंवरसिंह शेखावत, महेश परमार और प्रताप ग्रेवाल शामिल हैं। समिति 5 जनवरी को अपनी रिपोर्ट देगी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करेगी।

जनता के सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

भागीरथपुरा की जनता अब सीधे-सीधे जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रही है। आरोप है कि निगमायुक्त दिलीप यादव से लेकर पार्षद, अभियंता और अधिकारियों तक ने गंदे पानी की शिकायतों को नजरअंदाज किया। लीकेज, टेंडर और मरम्मत में लापरवाही होती रही, और जब तक प्रशासन जागा, तब तक 13 घरों के चिराग बुझ चुके थे।

इंदौर की यह त्रासदी सिर्फ एक क्षेत्र की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो शिकायतों के बावजूद नहीं जागा—और जिसकी कीमत मासूमों और बुजुर्गों ने अपनी जान देकर चुकाई।