नववर्ष की शुरुआत आमतौर पर नई उम्मीदों के साथ होती है, लेकिन इस बार 1 जनवरी से आम लोगों की जेब और दिनचर्या से जुड़े कई बड़े बदलाव भी लागू हो रहे हैं। ट्रेन से सफर करने वालों से लेकर मकान मालिक, वाहन खरीदार और टैक्सपेयर्स तक—लगभग हर वर्ग पर इन नियमों का असर पड़ेगा। ऐसे में साल के पहले दिन सफर शुरू करने या कोई बड़ा फैसला लेने से पहले नई व्यवस्थाओं को समझ लेना बेहद जरूरी हो गया है।
ट्रेन पकड़ने से पहले शेड्यूल देखना अब और जरूरी
1 जनवरी से रेलवे का नया टाइम टेबल लागू हो गया है। भोपाल मंडल समेत कई स्टेशनों पर चलने वाली यात्री ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान समय में आंशिक बदलाव किया गया है। रेलवे ने कई ट्रेनों की औसत गति बढ़ाई है, जिससे यात्रा का समय तो कम होगा, लेकिन यात्रियों को पुराने समय के भरोसे स्टेशन पहुंचना भारी पड़ सकता है। रानी कमलापति–रीवा एक्सप्रेस, भोपाल–इटारसी एक्सप्रेस, कटनी–बीना, बिलासपुर–भोपाल, ग्वालियर–बीना और कोटा–बीना एक्सप्रेस जैसी प्रमुख गाड़ियों के समय में बदलाव हुआ है। इसलिए सफर से पहले ऑनलाइन शेड्यूल चेक करना अब मजबूरी बन गया है।
रेल किराया बढ़ा, सफर पड़ेगा महंगा
नए साल के साथ ही रेल यात्रा की लागत भी बढ़ गई है। अलग-अलग दूरी के हिसाब से किराए में बढ़ोतरी की गई है। 216 से 750 किलोमीटर तक की यात्रा पर 5 रुपए ज्यादा देने होंगे, जबकि 751 से 1250 किलोमीटर की दूरी पर 10 रुपए, 1251 से 1750 किलोमीटर पर 15 रुपए और 1751 से 2250 किलोमीटर की दूरी पर 20 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी दोनों श्रेणियों में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की अतिरिक्त बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। यानी अब लंबी दूरी का सफर पहले से थोड़ा ज्यादा भारी पड़ेगा।
प्रॉपर्टी टैक्स पर नहीं मिलेगी 3% की छूट
नगर निगम ने नए साल से प्रॉपर्टी टैक्स पर मिलने वाली 3 प्रतिशत की रियायत खत्म करने का फैसला किया है। राजधानी भोपाल में ही 5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स अकाउंट हैं, जिनमें से करीब आधे लोगों ने अभी तक टैक्स जमा नहीं किया है। अब 1 जनवरी के बाद टैक्स जमा करने वालों को कोई छूट नहीं मिलेगी। निगम का मानना है कि इससे टैक्स वसूली बढ़ेगी और लोग समय पर भुगतान करने के लिए प्रेरित होंगे।
सेकंड हैंड गाड़ियों की खरीदी-बिक्री में सख्ती
पुरानी गाड़ियां खरीदने और बेचने वालों के लिए भी नए साल से नियम सख्त हो गए हैं। अब सेकंड हैंड वाहन की खरीदी-बिक्री के दौरान प्राधिकार पत्र (ऑथराइजेशन लेटर) अनिवार्य होगा। वाहन बेचने वाले को शपथ पत्र के माध्यम से अपने सभी अधिकार सेकंड हैंड कार बाजार संचालक को सौंपने होंगे। वहीं, गाड़ी बिकने तक उसकी पूरी जिम्मेदारी भी संचालक की होगी। इस बदलाव का मकसद फर्जी लेन-देन और कानूनी विवादों पर लगाम लगाना है।
इनकम टैक्स रिटर्न के नियम बदले, जांच होगी सख्त
1 जनवरी 2026 से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया भी बदल रही है। नया आईटी फॉर्म लागू किया जाएगा, जिसमें टैक्स विभाग अब आवेदक से ज्यादा जानकारी मांगेगा—जैसे बैंक लेनदेन, खर्च और निवेश का पूरा ब्यौरा। इससे फाइलिंग प्रक्रिया भले आसान लगे, लेकिन जांच पहले से ज्यादा सख्त होगी। साथ ही आरबीआई के निर्देश के तहत डॉर्मेंट और इनएक्टिव बैंक खातों को बंद करने की प्रक्रिया भी तेज होगी। पैन और आधार लिंकिंग की डेडलाइन भी नजदीक है, जिससे लापरवाही महंगी पड़ सकती है।
जीएसटी नियमों में मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य
नए साल से जीएसटी व्यवस्था में भी अहम बदलाव किए गए हैं। अब जीएसटी पोर्टल पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को सख्ती से लागू किया जा रहा है। छोटे व्यापारियों के लिए ई-इनवॉइस की सीमा में कमी का अनुमान है, वहीं ई-वे बिल से जुड़े नियम भी और कड़े हो गए हैं। कॉर्पोरेट संस्थाओं द्वारा प्रायोजन सेवाओं पर जीएसटी वसूली का तरीका बदला गया है और कुछ अचल संपत्तियों के किराए पर जीएसटी नियम भी सख्त किए गए हैं।
भारत सीरीज रजिस्ट्रेशन पर लगेगा जुर्माना
भारत (BH) सीरीज में वाहन रजिस्ट्रेशन कराने वालों के लिए भी चेतावनी है। जिन वाहन मालिकों ने 2 साल के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था और समय पर उसका नवीनीकरण नहीं करवाया, उन पर 1 जनवरी से जुर्माना लगाया जाएगा। शहर में ऐसे करीब 850 वाहन मालिकों की पहचान की गई है। नए साल में यह लापरवाही सीधे जेब पर भारी पड़ सकती है।
नया साल, नए नियम—सतर्क रहना जरूरी
कुल मिलाकर, 1 जनवरी से लागू हो रहे ये बदलाव आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़े हैं। चाहे सफर हो, टैक्स भुगतान हो या वाहन खरीदना-बेचना—हर कदम पर नई व्यवस्था को समझना और समय रहते तैयारी करना जरूरी हो गया है, ताकि नए साल की शुरुआत किसी परेशानी के साथ न हो।