Indore News : मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैली जल त्रासदी ने एक ऐसी मां की गोद सूनी कर दी है, जिसने अपने बच्चे के लिए 10 साल तक लंबा इंतजार और 9 महीने का कठिन संघर्ष किया था। नगर निगम की लापरवाही से नलों में आए ‘जहरीले’ पानी ने 6 माह के मासूम की जान ले ली, जिससे पूरे मराठी मोहल्ले में मातम पसरा है।
10 साल का इंतजार, चंद मिनटों की लापरवाही
पीड़ित मां साधना साहू की कहानी सुनकर हर पत्थर दिल इंसान की आंखें भर आएं। शादी के 10 साल बाद साधना और उनके पति के जीवन में इस बच्चे के रूप में खुशियां आई थीं। गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण साधना को पूरे 9 महीने बेड रेस्ट पर रहना पड़ा था। उन्होंने एक-एक दिन बड़ी सावधानी से काटा ताकि उनका बच्चा सुरक्षित दुनिया में आ सके।
‘जीवन’ समझकर पिलाया ‘जहर‘
साधना ने बताया कि उन्हें दूध कम आता था, इसलिए वे बच्चे को बाहर का दूध पिलाती थीं। दूध को पतला करने के लिए उन्होंने उसमें नल का पानी मिलाया। उन्हें क्या पता था कि जिस पानी को वे जीवनदायिनी समझ रही हैं, वह वास्तव में मौत का कारण बनेगा। दूषित पानी पीने के बाद मासूम को भीषण उल्टी और दस्त हुए और 29 दिसंबर को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिवार की 10 साल की बेटी भी वर्तमान में बीमार है।
प्रशासन पर गंभीर सवाल और सरकारी सक्रियता
परिजनों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से गंदा पानी आ रहा था, लेकिन प्रशासन ने सुध नहीं ली। अब जब हालात बेकाबू हो गए हैं, तब सरकार जागी है।
वर्तमान स्थिति: स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 149 गंभीर मरीज सामने आए हैं।
मृतकों का आंकड़ा: आधिकारिक पुष्टि 7 मौतों की है, जबकि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने संख्या 9 बताई है। स्थानीय लोग यह आंकड़ा 13 तक बता रहे हैं।
सीएम का दौरा: मुख्यमंत्री मोहन यादव आज खुद भागीरथपुरा पहुंचकर पीड़ित साहू परिवार से मुलाकात करेंगे।
साधना का रो-रोकर बुरा हाल है, वे बस एक ही सवाल पूछ रही हैं— “मेरा बच्चा तो चला गया, पर प्रशासन बताए कि और कितने बच्चे इस लापरवाही की भेंट चढ़ेंगे?”