इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का दौरा विवादों और हंगामे की भेंट चढ़ गया। मंत्री सिलावट रविवार को क्षेत्र में विकास कार्यों का जायजा लेने और आम जनता की समस्याएं सुनने पहुंचे थे। हालांकि, मौके पर मौजूद उनके समर्थकों के व्यवहार के कारण स्थानीय रहवासी अपनी बात मंत्री तक पहुंचा ही नहीं सके। इससे लोगों में खासी नाराजगी देखी गई।
दरअसल, मंत्री सिलावट ने दावा किया था कि पार्टी कार्यकर्ता और उनके समर्थक आम जनता की मदद करेंगे और समस्याओं का समाधान करवाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आई। जब स्थानीय लोग अपनी परेशानियां लेकर मंत्री के पास जाने की कोशिश कर रहे थे, तो समर्थकों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, समर्थकों ने फरियादियों को बोलने का मौका ही नहीं दिया और उन्हें पीछे धकेल दिया।
समर्थकों की भीड़ में दबी जनता की आवाज
भागीरथपुरा जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्र में कई बुनियादी समस्याएं व्याप्त हैं। लोग पानी, सीवेज और सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर मंत्री से शिकायत करना चाहते थे। मंत्री के आगमन की सूचना पर बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग अपनी अर्जी लेकर खड़े थे। लेकिन जैसे ही मंत्री का काफिला रुका, समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और मंत्री को चारों तरफ से घेर लिया।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वे घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन समर्थकों की धक्का-मुक्की के कारण वे मंत्री के पास तक नहीं जा सके। कुछ लोगों ने जब आवाज उठाने की कोशिश की, तो उन्हें समर्थकों द्वारा चुप करा दिया गया। इस अव्यवस्था के कारण मंत्री भी बिना किसी से ठीक से संवाद किए वहां से निकल गए।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब किसी मंत्री के दौरे में समर्थकों की अति-उत्साह के कारण जनता को परेशानी उठानी पड़ी हो। इससे पहले भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियानों के दौरान ऐसी स्थितियां बन चुकी हैं। अक्सर देखा गया है कि ‘वीआईपी कल्चर’ और समर्थकों का घेरा जनप्रतिनिधियों को आम जनता से दूर कर देता है।
ताजा घटनाक्रम के बाद क्षेत्र के लोगों में निराशा है। उनका कहना है कि चुनाव के समय तो नेता घर-घर आते हैं, लेकिन जीतने के बाद अपनी समस्याएं सुनाने के लिए भी जनता को संघर्ष करना पड़ता है। मंत्री सिलावट के इस दौरे का उद्देश्य भले ही जनसंपर्क था, लेकिन समर्थकों के रवैये ने इसे केवल एक औपचारिकता बना दिया।
प्रशासनिक अमले की भूमिका पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मूकदर्शक बने रहे। भीड़ को नियंत्रित करने और फरियादियों को मंत्री तक पहुंचाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी। संकरी गलियों में भारी भीड़ के कारण जाम की स्थिति भी बनी रही, जिससे आम राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।