MP में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, प्रोबेशन पीरियड घटकर 6 महीने हुआ, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए निर्देश

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने नव-नियुक्त कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब सरकारी सेवा में आने वाले नए कर्मचारियों को स्थायी होने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में नए निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत प्रोबेशन पीरियड को घटाकर 6 महीने कर दिया गया है।

राज्य सरकार के इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे पहले, कर्मचारियों को स्थायी होने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया बेहद सरल और समयबद्ध हो गई है।

अब 6 महीने में हो सकेगा स्थायीकरण

नए नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसे 6 महीने तक परिवीक्षा अवधि में रखा जाएगा। अगर इन 6 महीनों के दौरान कर्मचारी का कार्य और व्यवहार संतोषजनक पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से नियमित (Regular) कर दिया जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है जो अपनी नौकरी की शुरुआत में अनिश्चितता का सामना करते थे।

विभागीय परीक्षा पास करना अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन पदों के लिए विभागीय परीक्षा पास करना अनिवार्य है, वहां नियम थोड़े अलग होंगे। ऐसे मामलों में, यदि कोई कर्मचारी 6 महीने का प्रोबेशन पूरा कर लेता है लेकिन विभागीय परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसका प्रोबेशन पीरियड तब तक बढ़ा दिया जाएगा जब तक वह परीक्षा पास नहीं कर लेता। हालांकि, यह बढ़ी हुई अवधि अधिकतम दो साल तक ही हो सकती है।

पहले क्या थी व्यवस्था?

इससे पहले, मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन पीरियड की व्यवस्था काफी सख्त थी। कमलनाथ सरकार के दौरान 2019 में नियमों में बदलाव करते हुए प्रोबेशन पीरियड को 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया था। इसके साथ ही वेतन को लेकर भी स्टाइपेंड का नियम लागू किया गया था।

उस समय की व्यवस्था के तहत:

  • पहले साल में वेतन का 70% मिलता था।
  • दूसरे साल में 80% वेतन दिया जाता था।
  • तीसरे साल में 90% वेतन मिलता था।
  • चौथे साल में जाकर कर्मचारी को पूरा वेतन मिलना शुरू होता था।

हालांकि, वर्तमान मोहन यादव सरकार ने इस स्टाइपेंड वाली व्यवस्था को पहले ही खत्म कर दिया था और अब प्रोबेशन पीरियड को भी घटाकर कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है।

परिवीक्षा अवधि का अधिकतम समय

नए निर्देशों में यह भी उल्लेख है कि यदि किसी कर्मचारी का काम संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उसकी परिवीक्षा अवधि को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन किसी भी स्थिति में यह बढ़ा हुआ समय मूल अवधि के दोगुने से अधिक नहीं होगा। यानी 6 महीने की मूल अवधि को अधिकतम 6 महीने और बढ़ाया जा सकता है, जिससे कुल समय एक साल से ज्यादा नहीं होगा।

सभी विभागों को निर्देश जारी

सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को पत्र लिखकर इन नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रहेगा। यह फैसला न केवल नई नियुक्तियों पर लागू होगा, बल्कि इससे भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी आने की उम्मीद है।