भागीरथपुरा जलकांड: उमा भारती ने महापौर भार्गव पर साधा निशाना, पूछा- जब नहीं चली तो पद पर बैठे बिसलेरी क्यों पीते रहे?

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से हुई 15 मौतों के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर प्रशासन और नगर निगम सवालों के घेरे में हैं। इस बीच, भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही पार्टी के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर महापौर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘पाप’ करार दिया है।

उमा भारती ने महापौर को संबोधित करते हुए लिखा कि अगर प्रशासनिक अधिकारी आपकी बात नहीं सुन रहे थे, तो आप पद पर बने रहकर ‘बिसलेरी का पानी’ क्यों पीते रहे? उन्होंने सवाल किया कि जब व्यवस्था पर आपका नियंत्रण नहीं था, तो आपने पद छोड़कर जनता के बीच जाने का निर्णय क्यों नहीं लिया। उमा भारती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में कोई भी स्पष्टीकरण या बचाव मान्य नहीं होता। इसके लिए या तो प्रायश्चित करना पड़ता है या फिर दंड भुगतना पड़ता है।
मुख्यमंत्री के लिए ‘परीक्षा की घड़ी’
पूर्व मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी दूषित पानी से हुई इन मौतों को राज्य सरकार और पूरी व्यवस्था के लिए शर्मनाक बताया था। उनका कहना था कि किसी के जीवन की कीमत महज दो लाख रुपये का मुआवजा नहीं हो सकती। पीड़ित परिवारों का दुख जीवन भर बना रहता है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पीड़ितों से माफी मांगने की अपील की। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को मुख्यमंत्री के लिए ‘परीक्षा की घड़ी’ बताया है।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इंदौर में पानी की जगह ‘जहर’ बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब लोगों ने दूषित पानी की शिकायतें की थीं, तो सप्लाई समय रहते क्यों नहीं रोकी गई।
उन्होंने पूछा कि सीवर का पानी पीने की लाइन में कैसे मिल गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी। राहुल ने इसे जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
रेसीडेंसी कोठी की बैठक में फूटा था महापौर का गुस्सा
इससे पहले, 1 जनवरी को रेसीडेंसी कोठी में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपनी बेबसी जाहिर की थी। बैठक में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, एसीएस संजय दुबे और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। महापौर ने आरोप लगाया था कि निगम के अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते और फैसलों का पालन नहीं किया जाता।
महापौर ने कहा था कि एक ही अधिकारी को सारे काम सौंप दिए गए हैं, जबकि अन्य अधिकारी निष्क्रिय बैठे हैं। उन्होंने अधिकारियों की कमी न होने की बात कहते हुए सही कार्य विभाजन की मांग की थी। बैठक में जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा ने भी हालात खराब होने की बात स्वीकारते हुए कहा था कि अब तो हाथ उठाने की नौबत आ गई है। वहीं, पार्षद कमल वाघेला और विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी अधिकारियों के असहयोगपूर्ण रवैये और फोन न उठाने की शिकायत की थी।

“जब आपकी नहीं चली तो पद पर बैठे-बैठे बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? यह पाप है।” — उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री

भागीरथपुरा त्रासदी के बाद अब जवाबदेही तय करने की मांग जोर पकड़ रही है। जनता और विपक्ष दोनों ही यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या केवल बयानों से काम चलेगा या फिर इस मानवीय भूल के लिए दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई भी होगी।