जबलपुर में स्वामी रामभद्राचार्य का बड़ा बयान: रामायण को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करें पीएम मोदी, पहलगाम हमले पर भी जताई चिंता

जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने एक बार फिर रामचरितमानस और रामायण को राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा देने की मांग उठाई है। मध्य प्रदेश के जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे जल्द ही इस दिशा में निर्णय लें। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि वे पीएम मोदी को अपना मित्र मानते हैं और उनसे यह अपेक्षा रखते हैं कि वे रामायण को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करेंगे।

स्वामी रामभद्राचार्य इन दिनों जबलपुर में ‘सियाराम कथा’ के आयोजन के सिलसिले में मौजूद हैं। यहां उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए देश के वर्तमान हालात और धार्मिक विषयों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का आधार है।

पहलगाम हमले पर जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले पर स्वामी रामभद्राचार्य ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आतंकवाद के खिलाफ और अधिक सख्त कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

“पहलगाम में जो हुआ वह अत्यंत दुखद है। सरकार को आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।” — स्वामी रामभद्राचार्य

‘बंटेगे तो कटेंगे’ नारे का समर्थन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चर्चित नारे ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ पर भी स्वामी रामभद्राचार्य ने अपनी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह नारा वर्तमान परिस्थितियों में बिल्कुल प्रासंगिक है। हिंदू समाज को एकजुट रहने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एकता में ही शक्ति है और यदि समाज बंटा तो उसका नुकसान उठाना पड़ेगा।

कुंभ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग

प्रयागराज में आयोजित होने वाले आगामी महाकुंभ को लेकर भी जगतगुरु ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुंभ मेले में गैर-हिंदुओं को दुकानें आवंटित नहीं की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि यह आस्था का विषय है और यहां केवल सनातन धर्म में विश्वास रखने वालों को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

शास्त्रीय संगीत की उपेक्षा पर नाराजगी

जबलपुर को संस्कारधानी बताते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने यहां के संगीत महाविद्यालय की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस शहर की पहचान कला और संस्कृति से रही हो, वहां शास्त्रीय संगीत की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सरकार से संगीत महाविद्यालय की व्यवस्थाओं को सुधारने की अपील की।

गौरतलब है कि स्वामी रामभद्राचार्य अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। इससे पहले भी वे कई मंचों से रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की वकालत कर चुके हैं। जबलपुर में उनके आगमन पर भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनकी कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं।