Indore News : बीते हफ्ते सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की चाल एक-दूसरे के विपरीत रही। जहां एक तरफ सोने की चमक फीकी पड़ी, वहीं चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। आंकड़ों के मुताबिक, इस हफ्ते सोने के दाम में 3,174 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी 6,443 रुपये महंगी हो गई।
बाजार के जानकारों के अनुसार, सोने का भाव गिरकर 1,34,782 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इससे पिछले हफ्ते, यानी 26 दिसंबर को यह 1,37,956 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी की बात करें तो यह 2,28,107 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2,34,550 रुपये पर पहुंच गई है।
2025 में हुई रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी
बीता साल यानी 2025 कीमती धातुओं के लिए ऐतिहासिक रहा। आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने की कीमत में एक साल के भीतर 75% की भारी वृद्धि हुई। 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोने का भाव 76,162 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1,33,195 रुपये हो गया। यानी निवेशकों को प्रति 10 ग्राम 57,033 रुपये का मुनाफा हुआ।
चांदी ने तो रिटर्न के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया। इस दौरान चांदी के भाव में 167% का इजाफा हुआ। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,017 रुपये की थी, जो साल के अंत तक 2,30,420 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इसमें कुल 1,44,403 रुपये की बढ़त दर्ज की गई।
सोने में तेजी के प्रमुख कारण
बाजार विशेषज्ञों ने सोने की कीमतों में लंबी अवधि की तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं:
1. कमजोर डॉलर: अमेरिका द्वारा ब्याज दरों में कटौती के फैसले से डॉलर कमजोर हुआ है। इससे सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई है और निवेशकों का रुझान पीली धातु की ओर बढ़ा है।
2. जियोपॉलिटिकल तनाव: रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में निवेशक सोने को ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी कर रहे हैं।
3. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोना बढ़ा रहे हैं। पिछले एक साल में केंद्रीय बैंकों ने 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा है, जिससे कीमतों को समर्थन मिला है।
चांदी क्यों हो रही है महंगी?
चांदी की कीमतों में उछाल के पीछे सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग भी बड़ा कारण है:
1. इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब यह सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि एक जरूरी कच्चा माल बन चुकी है।
2. सप्लाई की चिंता: अमेरिकी कंपनियों द्वारा चांदी का भारी स्टॉक जमा करने और ग्लोबल सप्लाई में कमी की आशंका से कीमतें चढ़ रही हैं। ट्रंप की नीतियों और टैरिफ के डर से भी पैनिक बाइंग देखी गई है।
3. मैन्युफैक्चरिंग होड़: उत्पादन रुकने के डर से निर्माता पहले से ही चांदी खरीदकर रख रहे हैं। माना जा रहा है कि यह ट्रेंड आने वाले महीनों में भी जारी रहेगा।
आगे क्या रहेगा बाजार का हाल?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि कीमती धातुओं में तेजी का दौर अभी थमेगा नहीं। चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे इस साल इसके भाव 2.75 लाख रुपये प्रति किलो तक जाने की संभावना है। वहीं, सोने की मांग भी बरकरार है और साल के अंत तक यह 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है।