इंदौर के स्नेह नगर और पटेल नगर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस गंभीर मुद्दे पर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रोशनपुरा चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग की। उनका कहना है कि विभागीय मंत्री होने के नाते उन्हें इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
प्रशासन पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शहर में साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना नगर निगम और सरकार की जिम्मेदारी है। स्नेह नगर और पटेल नगर जैसी कॉलोनियों में दूषित पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले इंदौर में बुनियादी सुविधाओं का यह हाल क्यों है? उन्होंने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की है।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर के स्नेह नगर और पटेल नगर इलाके में पिछले दिनों दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ गए थे। उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद हड़कंप मच गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। इसकी शिकायत नगर निगम से की गई थी, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इलाके में सर्वे किया और पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे।
विपक्ष का आक्रामक रुख
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य है जिसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
“जनता को साफ पानी देना सरकार का कर्तव्य है। यह मौते नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही से हुई हत्याएं हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।” — कांग्रेस नेता
फिलहाल, प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और प्रभावित इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। साथ ही, ड्रेनेज और पानी की लाइनों के मिलान की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।