MP News: भोपाल में रिवर फ्रंट के नाम पर बेघर होंगे 1.30 लाख लोग, एनजीटी के फैसले के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बड़े विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। यहां रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और अतिक्रमण हटाने की मुहिम के चलते करीब 1.30 लाख लोगों के सिर से छत छिनने का खतरा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के एक आदेश के बाद जिला प्रशासन ने शहर की करीब 30 बस्तियों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

प्रशासन की इस कार्रवाई की जद में लगभग 25 हजार मकान आ रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी के विस्थापन की खबर से इन बस्तियों में हड़कंप मच गया है। रहवासियों ने अब एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।

एनजीटी का आदेश और प्रशासन की तैयारी

दरअसल, एनजीटी ने कलियासोत, केरवा और भदभदा क्षेत्र में नदी के कैचमेंट एरिया और ग्रीन बेल्ट में हुए अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा है कि नदी किनारे के 33 मीटर के दायरे में आने वाले निर्माण अवैध हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए।

इस आदेश के पालन में जिला प्रशासन ने सर्वे शुरू कर दिया है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, इन क्षेत्रों में बसी करीब 30 बस्तियां पूरी तरह से इस दायरे में आ रही हैं। प्रशासन का तर्क है कि पर्यावरण संरक्षण और रिवर फ्रंट के विकास के लिए यह कार्रवाई जरूरी है।

रहवासियों का विरोध और आंदोलन की चेतावनी

बस्तियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे पिछले 40-50 सालों से यहां रह रहे हैं। उनके पास बिजली के बिल, वोटर आईडी और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मौजूद हैं। अचानक उन्हें अवैध बताकर बेघर करना अन्याय है।

स्थानीय नागरिक संगठनों और रहवासियों ने मिलकर एक संघर्ष समिति का गठन किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बुलडोजर चलाया गया तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि सरकार पहले उनके पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करे, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाए।

राजनीतिक गरमाहट और पूर्व की घटनाएं

इस मुद्दे पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर गरीबों को उजाड़ने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि रिवर फ्रंट के नाम पर गरीबों के आशियाने उजाड़ना संवेदनहीनता है। वहीं, सरकार का पक्ष है कि वे केवल कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं और प्रभावितों के लिए उचित व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी भोपाल में भदभदा बस्ती को हटाने के दौरान काफी बवाल हुआ था। उस समय भी प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ मुहिम चलाई थी, जिसका स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध किया था। अब एक बार फिर उससे भी बड़े पैमाने पर विस्थापन की आहट ने शहर का माहौल गरमा दिया है।

क्या है रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट?

भोपाल में साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर कलियासोत नदी के किनारे रिवर फ्रंट विकसित करने की योजना है। इसके तहत नदी के दोनों ओर सौंदर्यीकरण किया जाएगा, वॉकवे बनाए जाएंगे और पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। लेकिन इस विकास की कीमत हजारों परिवारों को अपनी छत खोकर चुकानी पड़ सकती है।

फिलहाल, प्रशासन और रहवासियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सरकार एनजीटी के आदेश और मानवीय पहलू के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।