भागीरथपुरा जल कांड: इंदौर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी- ज़हरीले पानी से शहर की छवि धूमिल

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि इस घटना ने देशभर में इंदौर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है।

स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार नंबर वन रहने वाले शहर में पीने का पानी ही सुरक्षित न होना एक गंभीर चिंता का विषय है।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मुख्य सचिव को तलब करने के संकेत दिए हैं। अदालत का कहना है कि यह समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में पेश किए गए जवाबों को नाकाफी और असंवेदनशील बताते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।

प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रशासन को स्थानीय निवासियों ने बहुत पहले ही पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की थीं। अगर समय रहते उन शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो आज यह नौबत नहीं आती। सीनियर काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2022 में महापौर ने नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में कहा कि अभी भी प्रभावित इलाकों में जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह पूरी तरह पीने योग्य नहीं है। हालांकि, 31 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि नागरिकों को हर हाल में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

मौतों का आंकड़ा बढ़ा, 17वीं जान गई

भागीरथपुरा में दूषित जल का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक कुल 17 लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा मामला एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा (69) का है, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। वे धार से अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे।

1 जनवरी को उल्टी-दस्त की शिकायत पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनकी किडनी खराब होने की बात सामने आई और वेंटिलेटर पर रहने के बाद रविवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

मौजूदा स्थिति की बात करें तो अस्पतालों में अभी भी 110 मरीज भर्ती हैं। अब तक कुल 421 लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं, जिनमें से 311 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। गंभीर हालत वाले 15 मरीजों का इलाज आईसीयू में चल रहा है। पिछले 24 घंटों में उल्टी-दस्त के 38 नए मरीज सामने आए हैं, जिनमें से 6 को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया है।

हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर

इस गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाओं सहित कुल तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। पहली याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी, दूसरी पूर्व पार्षद प्रमोद द्विवेदी की ओर से और तीसरी भागीरथपुरा निवासी वरुण गायकवाड़ की ओर से लगाई गई है।

इन याचिकाओं में मुख्य रूप से प्रभावित लोगों के मुफ्त इलाज और शुद्ध पेयजल की मांग की गई है। वहीं, एक याचिका में मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की भी मांग थी। पिछली सुनवाई में जब सरकार ने केवल 4 मौतों की जानकारी दी थी, तो कोर्ट ने आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर पर नाराजगी जताई थी।

कलेक्टर-कमिश्नर ने किया दौरा

प्रशासनिक स्तर पर भी अब हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरा का दौरा किया। अधिकारियों ने पाइपलाइन लीकेज सुधारने के काम और दवा वितरण व्यवस्था का जायजा लिया।

कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र में रिंग सर्वे जारी है और पानी के सैंपल लगातार जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है।

नगर निगम ने कोर्ट में अपनी सफाई पेश करते हुए बताया कि जोन-4 के जोनल अधिकारी और असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि सब इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है।

निगम ने दावा किया कि प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए साफ पानी भेजा जा रहा है। 30 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच करीब 100 से अधिक टैंकरों से पानी की सप्लाई की गई, जिसके फोटोग्राफ्स भी कोर्ट में सबूत के तौर पर रखे गए।