MP बिजली बिल: समाधान योजना में सुस्ती, 91 लाख में से सिर्फ 10% उपभोक्ताओं ने ही उठाया लाभ

मध्य प्रदेश में बिजली बिलों के बकाया और विवादों को सुलझाने के लिए शुरू की गई ‘समाधान योजना’ को अपेक्षित सफलता मिलती नहीं दिख रही है। बिजली कंपनियों द्वारा किए गए तमाम दावों के बावजूद आंकड़ों की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राज्य में करीब 91 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, लेकिन इनमें से अब तक बमुश्किल 10 प्रतिशत लोगों ने ही इस समाधान प्रक्रिया में हिस्सा लिया है।

बिजली विभाग का उद्देश्य था कि इस योजना के माध्यम से लंबे समय से अटके हुए बिलों का निपटारा हो सके और उपभोक्ताओं को राहत मिले। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसका असर काफी कम नजर आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जागरूकता की कमी और प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं में संशय इसके पीछे की बड़ी वजह हो सकती है।

सिर्फ 10 फीसदी उपभोक्ताओं का रुझान

विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश भर में बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या 91 लाख के आसपास है। इनमें से एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके बिलों में विसंगतियां हैं या पुराना बकाया है। सरकार को उम्मीद थी कि समाधान योजना के तहत बड़ी संख्या में लोग आवेदन करेंगे। लेकिन अब तक के रुझानों से पता चलता है कि केवल 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ही अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए इस मंच का उपयोग किया है।

विभाग के सामने चुनौती

इतनी कम भागीदारी ने बिजली कंपनियों के प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। विभाग अब इस बात की समीक्षा कर रहा है कि आखिर क्यों लोग इस योजना से नहीं जुड़ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि कई बार जटिल कागजी कार्रवाई और स्पष्ट जानकारी न होने के कारण ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता ऐसी योजनाओं से दूर रह जाते हैं।

जागरूकता अभियान की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार चाहती है कि बाकी बचे 90 प्रतिशत उपभोक्ता भी इस योजना का लाभ उठाएं, तो उसे प्रचार-प्रसार की रणनीति बदलनी होगी। केवल दफ्तरों में नोटिस चस्पा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कैंप लगाकर लोगों को मौके पर ही समाधान देना होगा। विभाग आने वाले दिनों में इस योजना को गति देने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की योजना बना रहा है।

गौरतलब है कि यह योजना उन उपभोक्ताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिनके बिल कोरोना काल या अन्य कारणों से बहुत अधिक बढ़ गए थे और वे उसे चुकाने में असमर्थ थे। लेकिन वर्तमान सुस्त रफ्तार यह बताती है कि अभी भी एक बड़ा वर्ग इस राहत से वंचित है।