मध्य प्रदेश में सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी भर्ती को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा। जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी सहमति दे दी है। सरकार ने न्यायालय को आश्वस्त किया है कि वह भर्ती के नियमों में सुधार करेगी।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन में केवल महिला उम्मीदवारों को ही आवेदन के लिए पात्र माना गया था। इस नियम के खिलाफ कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थीं। याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, जो समान अवसर और लिंग आधारित भेदभाव न करने की बात करते हैं।
सरकार ने मानी गलती, बदलेगी नियम पुस्तिका
हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल करने के लिए तैयार है। इसके लिए जल्द ही शुद्धि पत्र (corrigendum) जारी किया जाएगा।
सरकार के इस बयान के बाद, कोर्ट ने कर्मचारी चयन मंडल को निर्देश दिया है कि वह अपनी नियम पुस्तिका (Rule Book) में जरूरी संशोधन करे। साथ ही, पुरुष आवेदकों के लिए ऑनलाइन आवेदन का लिंक फिर से खोलने के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि वे इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।
क्या था पूरा विवाद?
कर्मचारी चयन मंडल ने प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों और अस्पतालों में सहायक प्राध्यापकों और अन्य पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें नर्सिंग सिस्टर और ट्यूटर जैसे पदों के लिए सिर्फ महिलाओं को योग्य बताया गया था। इसके विरोध में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल और अन्य पुरुष उम्मीदवारों ने याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे नर्सिंग में एमएससी और बीएससी की डिग्री रखते हैं और पूरी तरह योग्य हैं। इसके बावजूद उन्हें लिंग के आधार पर प्रक्रिया से बाहर रखा गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने दलील दी कि यह भेदभाव असंवैधानिक है और योग्य पुरुष उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस भेदभाव पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट सवाल किया था कि आखिर किन नियमों के तहत पुरुषों को इस भर्ती से बाहर रखा गया है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद ही सरकार ने अपने रवैये में बदलाव किया है और अब सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर देने का फैसला लिया है।
इस फैसले से प्रदेश के सैकड़ों योग्य पुरुष उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है, जो नर्सिंग क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। अब संशोधित विज्ञापन जारी होने के बाद वे आधिकारिक तौर पर आवेदन कर सकेंगे।