इंदौर में पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन योजना में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले में प्रशासन को एक बड़ी सफलता मिली है। शासन की सख्ती और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, घोटाले के एक आरोपी छात्र तरुण कुमरावत ने 23,52,240 रुपये की पूरी राशि जिला कलेक्टर को वापस लौटा दी है। यह राशि छात्र ने नियमविरुद्ध तरीके से स्कॉलरशिप के रूप में प्राप्त की थी।
आदिवासी सेवा संघ के शिक्षा प्रकोष्ठ मंत्री और व्हिसल-ब्लोअर संजय सिंगार ने इस रिकवरी को भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई की पहली बड़ी जीत बताया है। जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश शासन के पिछड़ा वर्ग विभाग के अपर सचिव ने रिकवरी के आदेश जारी किए थे, जिसके अनुपालन में छात्र ने 6 जनवरी 2026 को यह राशि सरेंडर की।
बिना विदेश गए ही ले ली थी राशि
इस मामले की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। आयुक्त कार्यालय द्वारा 9 दिसंबर 2025 को जारी किए गए आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि आरोपी छात्र तरुण कुमरावत ने कभी विदेश यात्रा की ही नहीं। इसके बावजूद उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासन से 44,240 ऑस्ट्रेलियन डॉलर (लगभग 23.52 लाख रुपये) की राशि प्राप्त कर ली थी। जांच में पाया गया कि छात्र के पास न तो कोई वैध ऑफर लेटर था और न ही वह योजना की पात्रता रखता था।
कंसल्टेंसी और रैकेट की भूमिका उजागर
संजय सिंगार ने आरोप लगाया है कि यह मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। सिंगार के मुताबिक, इंदौर स्थित ‘साजो कंसल्टेंसी’ की संचालिका श्वेता जैन और उनके पति अंकुश जैन इस पूरे स्कॉलरशिप घोटाले के मुख्य सूत्रधार हैं। आरोप है कि यह कंसल्टेंसी अभ्यर्थियों से सांठ-गांठ कर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाती है और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से राशि पास करवाई जाती है।
इसके अलावा, भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा हो चुके द्वारका प्रसाद नायक का नाम भी इस सिंडिकेट में सामने आया है, जिसे पुराने स्कॉलरशिप घोटालों का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
“यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध रैकेट है। मेरी 1263 शिकायतों के बाद आज शासन ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए राशि की रिकवरी कर ली है। अब अगला चरण एफआईआर, गिरफ्तारी और शेष अपराधियों पर कठोर कार्यवाही होना चाहिए।” — संजय सिंगार, शिक्षा प्रकोष्ठ मंत्री, आदिवासी सेवा संघ
बहन के नाम पर भी साजिश का आरोप
जांच के दौरान एक और गंभीर खुलासा हुआ है। आरोपी तरुण कुमरावत ने अपनी बहन पूजा कुमरावत के नाम से भी इसी तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार कर योजना का धन हड़पने की साजिश रची थी। आदिवासी सेवा संघ ने मांग की है कि इस पूरे मामले की सीबीआई या ईओडब्ल्यू (EOW) से गहन जांच करवाई जाए।
भविष्य की कार्रवाई की मांग
संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि केवल राशि वसूली से काम नहीं चलेगा। घोटाले में शामिल कंसल्टेंसी संचालकों और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। साथ ही, 25 करोड़ रुपये के कथित स्कॉलरशिप घोटाले के अन्य सभी प्रकरणों की पुनः समीक्षा की मांग भी उठाई गई है, ताकि वास्तविक और जरूरतमंद पिछड़ा वर्ग के छात्रों के अधिकारों की रक्षा हो सके।