हिंदू धर्म में माघ मास का विशेष महत्व है और इस महीने में पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। साल 2026 में मौनी अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर पंचांग में स्पष्ट जानकारी दी गई है।
साल 2026 में मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 17 जनवरी 2026 की रात 03 बजकर 46 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 18 जनवरी 2026 को रात 04 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार, मौनी अमावस्या का व्रत और स्नान 18 जनवरी को ही किया जाएगा।
स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विधान है। 18 जनवरी 2026 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। धार्मिक दृष्टिकोण से इन मुहूर्तों में पूजा और दान करना फलदायी माना गया है।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में मौनी अमावस्या को ‘अमृत योग’ वाली तिथि कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करने से दैहिक, दैविक और भौतिक पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन ‘मौन व्रत’ रखने की परंपरा भी है। ऐसा माना जाता है कि मौन रहने से आत्मबल में वृद्धि होती है और मन की चंचलता समाप्त होती है।
इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में देवता पृथ्वी पर वास करते हैं और मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि और नियम
इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और मौन व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करें। पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र, तिल, और धन का दान करें। इस दिन गाय को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
पिछला संदर्भ
हर साल माघ मेले और कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु प्रयागराज और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर जुटते हैं। पिछले वर्षों में भी प्रशासन द्वारा इस मौके पर सुरक्षा और स्नान के व्यापक प्रबंध किए जाते रहे हैं। साल 2026 में भी इस पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।