Bhopal News : देश में लगातार आठ बार ‘सबसे स्वच्छ शहर’ का ख़िताब जीतने वाले इंदौर में जल-प्रदूषण की स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर जल-प्रदूषण मामले में किए गए एक ‘वाटर ऑडिट’ (Water Audit) के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया है।

सिंघार ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के ‘स्वच्छता’ और ‘विकसित भारत’ के दावे जमीनी हकीकत के विपरीत पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। उन्होंने भगीरथपुरा से लेकर शहर के कई अन्य गरीब व श्रमिक बस्तियों में नलों से दूषित और सीवेज मिश्रित पानी आने का दावा किया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह समस्या केवल एक विशेष इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शहरी प्रशासन की प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए महापौर और निगम अधिकारियों सहित सभी जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जानी चाहिए।
भगीरथपुरा का दौरा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
विपक्ष द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 6 जनवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष ने जल संकट से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र भगीरथपुरा का दौरा किया था। सिंघार के मुताबिक, स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों से मिली जानकारी के अनुसार दूषित पानी पीने से अब तक लगभग 20 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पीड़ितों से मिलने पहुंचा, तो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

सिंघार ने कहा कि पुलिस का रवैया कानून-व्यवस्था बनाने से ज्यादा विपक्ष को सच्चाई जानने से रोकने जैसा था। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार भारी दबाव में दिखे और कई लोग डर के कारण खुलकर बोलने से बच रहे थे। मुआवजे और इलाज को लेकर भी स्थानीय लोगों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
वाटर ऑडिट: 6 प्रमुख इलाकों की जमीनी हकीकत
भगीरथपुरा की घटना के बाद, 7 जनवरी 2026 को इंदौर के अन्य क्षेत्रों में भी पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए ‘वाटर ऑडिट’ किया गया। यह ऑडिट मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग और कनाडिया जैसे इलाकों में किया गया, जो भगीरथपुरा से 5 से 18 किलोमीटर दूर स्थित हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन बस्तियों में, जहां मुख्य रूप से श्रमिक वर्ग रहता है, वहां नलों से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है। खजराना में नर्मदा जल में तेज बदबू और कृष्णा बाग में पेयजल पाइपलाइन गटर के पास से गुजरने की बात सामने आई है। इसी तरह, भूरी टेकरी और मदीना नगर में भी पानी के अत्यधिक दूषित होने और नियमित बिल भरने के बावजूद साफ पानी न मिलने की शिकायतें मिली हैं।
“स्वच्छता के अवॉर्ड से लोग ज़िंदा नहीं रहते। ज़िंदा रहने के लिए साफ़ पानी चाहिए, जो सरकार नहीं दे पा रही है। दीवारों पर अवॉर्ड टंगे हैं और नालों में ज़हर बह रहा है।” — उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष
बजट और प्रबंधन पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर नगर निगम के बजट का हवाला देते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भी इंदौर को शीर्ष स्थान मिला और निगम का बजट 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके बावजूद, आजादी के 79 साल बाद और वर्ष 2026 में भी नागरिक पीने के साफ पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
