मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और प्रचार्यों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। आगामी शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ने शिक्षकों के अवकाश पर रोक लगा दी है। भोपाल स्थित मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। बोर्ड का मानना है कि परीक्षा के समय शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है जिससे छात्रों की पढ़ाई और मूल्यांकन कार्य प्रभावित न हो।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सितंबर माह में आयोजित होने वाली त्रैमासिक परीक्षाओं (Quarterly Exams) और अन्य विभागीय कार्यों के चलते यह निर्णय लिया गया है। अक्सर देखा गया है कि परीक्षा के दौरान शिक्षक उपार्जित अवकाश या आकस्मिक अवकाश पर चले जाते हैं, जिससे परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी लगाने में प्रशासन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी अव्यवस्था को रोकने के लिए बोर्ड ने यह कड़ा कदम उठाया है।
जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष अधिकार
जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी शिक्षक का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई विशेष परिस्थिति या मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो स्कूल के प्राचार्य सीधे छुट्टी मंजूर नहीं कर सकेंगे। ऐसे मामलों में अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या जिला कलेक्टर की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के यदि कोई शिक्षक अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बोर्ड का ‘जीरो टॉलरेंस’ का रुख
माध्यमिक शिक्षा मंडल इस सत्र में शैक्षणिक गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिले के सभी स्कूलों में नए नियमों का पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि परीक्षाओं का परिणाम समय पर तैयार हो और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कोई देरी न हो।
अतीत में भी अपनाई गई है सख्ती
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बोर्ड ने ऐसा सख्त रुख अपनाया है। इससे पहले भी वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं (10वीं और 12वीं) के दौरान माशिम ने इसी तरह शिक्षकों और पर्यवेक्षकों की छुट्टियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। उस समय भी कई शिक्षकों द्वारा स्वास्थ्य का हवाला देकर ड्यूटी से बचने के प्रयास किए गए थे, जिसके बाद विभाग ने मेडिकल बोर्ड से सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया था। वर्तमान आदेश को उसी सख्ती का विस्तार माना जा रहा है ताकि आगामी परीक्षाओं में किसी प्रकार की कोताही न बरती जा सके।
विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि शैक्षणिक कैलेंडर के महत्वपूर्ण पड़ावों पर छात्रों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन प्राथमिकता से करना होगा। इस आदेश के बाद से प्रदेश भर के स्कूलों में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।