चीतों के बाद अब असम से आएंगे एक सींग वाले गैंडे, भोपाल के वन विहार में लाने का प्रस्ताव तैयार

टाइगर स्टेट और लेपर्ड स्टेट का दर्जा हासिल करने के बाद मध्य प्रदेश अब वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कूनो में चीतों को बसाने के बाद, प्रदेश सरकार अब ‘एक सींग वाले गैंडे’ (One-Horned Rhinoceros) को राज्य में लाने की कवायद में जुट गई है। वन विभाग ने इसके लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी भोपाल स्थित वन विहार नेशनल पार्क (Van Vihar National Park) में गैंडों को लाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए असम सरकार और वहां के प्राणी उद्यानों से संपर्क किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया ‘एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम’ के तहत की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि गैंडों के आने से न केवल वन विहार की जैव विविधता में सुधार होगा, बल्कि यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

असम भेजे जाएंगे मध्य प्रदेश के बाघ

एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के नियमों के तहत, जब एक राज्य से कोई जानवर लाया जाता है, तो बदले में दूसरे राज्य को भी वहां की मांग के अनुसार वन्यजीव देने होते हैं। सूत्रों के मुताबिक, असम से गैंडों का जोड़ा (नर और मादा) लाने के बदले में मध्य प्रदेश सरकार उन्हें बाघ (Tiger) देने का प्रस्ताव रख सकती है। मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या देश में सर्वाधिक है, जिससे यह विनिमय आसान हो सकता है। यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) को भेजा जाएगा।

वन विहार में फिर गूंजेगी गैंडे की धमक

भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में गैंडों का इतिहास पुराना रहा है। यहां पहले ‘राजू’ नाम का एक गैंडा था, जो पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय था। लंबी बीमारी के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से वन विहार में गैंडे का बाड़ा खाली पड़ा है। पर्यटक लंबे समय से यहां गैंडे को देखने की इच्छा जता रहे थे। अब वन विभाग की इस पहल से उम्मीद जगी है कि जल्द ही भोपाल के लोग दोबारा इन विशालकाय जीवों को देख सकेंगे।

पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं, क्योंकि वन्यजीवों के स्थानांतरण के लिए कई प्रकार की वैधानिक मंजूरियां और सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। असम के चिड़ियाघर या नेशनल पार्क से गैंडों को सड़क या हवाई मार्ग से सुरक्षित लाने का खाका तैयार किया जा रहा है।

पिछला संदर्भ: गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीवों के पुनर्वास को लेकर पिछले कुछ वर्षों में काफी सक्रिय रही है। कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना था। अब वन विहार में गैंडों की वापसी को भी इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।