सिंधिया संपत्ति विवाद: बॉम्बे HC में मामला लंबित, समझौते के लिए ज्योतिरादित्य और बुआओं को अतिरिक्त समय मिला

Gwalior News : केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं (वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे) के बीच दशकों पुराने संपत्ति विवाद के निपटारे में अभी और समय लगेगा।

ग्वालियर खंडपीठ ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समझौता (राजीनामा) पेश करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया है। यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट में एक संबंधित मामले के लंबित होने के कारण लिया गया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे मामले का निपटारा होने के बाद, दोनों पक्षों को समझौता दाखिल करने के लिए 30 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी जाएगी।

समझौते में क्यों हो रही है देरी?

दरअसल, सिंधिया की बुआओं की ओर से कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया था। इसमें बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे संपत्ति से जुड़े एक अन्य मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को होनी है। इस वजह से जिला न्यायालय द्वारा दी गई 90 दिनों की समय-सीमा के भीतर समझौता पेश करना संभव नहीं है।

याचिका में मांग की गई थी कि बॉम्बे हाईकोर्ट का मामला सुलझने के बाद उन्हें सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 30 दिन का और समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त समय देने की मंजूरी दे दी।

एक दशक से ज्यादा पुराना है मामला

सिंधिया परिवार का यह संपत्ति विवाद काफी लंबा खिंच चुका है। यह मामला पहली बार साल 2010 में जिला न्यायालय में दर्ज किया गया था। इसके बाद, 2017 में यह मामला हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में पहुंचा। हालाकि, पिछले कुछ समय से भतीजे और बुआओं ने आपसी सहमति से इस विवाद को खत्म करने की इच्छा जताई थी।

इसी साल सितंबर में जिला न्यायालय ने मामले का निपटारा करते हुए दोनों पक्षों को 90 दिनों के भीतर समझौता पेश करने का आदेश दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट के मामले के कारण यह प्रक्रिया रुक गई और अब अतिरिक्त समय की मांग की गई, जिसे मंजूर कर लिया गया है।