सोमनाथ, गुजरात: गुजरात के विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में अब महिला सशक्तिकरण की एक नई गाथा लिखी जा रही है। श्री सोमनाथ ट्रस्ट की एक अनूठी पहल के तहत सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है, जो मंदिर के लिए शुद्ध और स्वादिष्ट प्रसाद तैयार कर रही हैं। यह मॉडल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि आस्था और रोजगार का एक बेहतरीन संगम भी प्रस्तुत करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, के मार्गदर्शन में यह परियोजना शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। इस पहल के माध्यम से महिलाएं अब घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर सम्मान के साथ जीवनयापन कर रही हैं।
शुद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
इस प्रसाद निर्माण इकाई में स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां बनने वाले प्रसाद, जैसे कि चिक्की, लड्डू और मगस, पूरी तरह से पारंपरिक और शुद्ध सामग्री से बनाए जाते हैं। इसके लिए विशेष रूप से गिर गाय के घी, शुद्ध गुड़ और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया जाता है।
यहां तैयार होने वाले सभी उत्पादों को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा प्रमाणित किया गया है, जो इसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करता है। प्रसाद बनाने से लेकर उसकी पैकेजिंग तक का सारा काम महिलाएं ही संभालती हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होती है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
सोमनाथ के आसपास के गांवों की कई महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं। पहले जो महिलाएं घरेलू कामों तक ही सीमित थीं, वे अब इस इकाई में काम करके हर महीने एक निश्चित आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे अपने परिवार के भरण-पोषण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
यह रोजगार उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करता है और समाज में उनकी स्थिति को भी मजबूत करता है। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की भावना को भी साकार करती है, जहां स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके स्थानीय लोगों को सशक्त बनाया जा रहा है।
ऑनलाइन माध्यम से भी उपलब्ध है प्रसाद
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस प्रसाद को बड़े चाव से खरीदते हैं। इसके अलावा, जो भक्त मंदिर नहीं आ सकते, उनके लिए ट्रस्ट ने इस प्रसाद को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की है। इससे इस पहल की पहुंच देश-विदेश तक हो गई है और महिलाओं द्वारा बनाए गए इस प्रसाद को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, सोमनाथ मंदिर की यह पहल महिला सशक्तिकरण का एक सफल और अनुकरणीय मॉडल है। यह दिखाता है कि कैसे धार्मिक संस्थान सामाजिक और आर्थिक उत्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।