इंदौर: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के इंदौर के भागीरथपुरा में प्रस्तावित दौरे को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान किए गए वादे के तहत उन्हें यहां नगर निगम द्वारा तोड़े गए एक मकान के पीड़ित परिवार से मिलना था। हालांकि, अब इस दौरे पर पार्टी के भीतर ही घमासान छिड़ गया है, जिससे यह कार्यक्रम अनिश्चितता के भंवर में फंस गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राहुल गांधी के 1 अप्रैल को आने की संभावना जताई थी, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने और प्रशासनिक अनुमति न मिलने से भी इस दौरे पर सवाल खड़े हो गए हैं।
श्रेय की सियासत और खुलकर सामने आई गुटबाजी
राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर स्थानीय कांग्रेस नेताओं में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। पार्टी के नेता राजू भदौरिया इस कार्यक्रम को लेकर सक्रिय हैं और इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं। वहीं, स्थानीय विधायक चिंटू चौकसे के समर्थक इस बात से नाराज हैं कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया में दरकिनार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों गुटों के बीच तनातनी बढ़ गई है। एक तरफ जहां भदौरिया का खेमा दौरे की तैयारियों में जुटा है, वहीं चौकसे खेमे का मानना है कि स्थानीय विधायक होने के नाते कार्यक्रम का नेतृत्व उन्हें करना चाहिए। इस आपसी खींचतान ने पार्टी की अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला भागीरथपुरा निवासी संजय बैरवा के मकान से जुड़ा है, जिसे कुछ समय पहले प्रशासन ने तोड़ दिया था। अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान जब राहुल गांधी मध्य प्रदेश से गुजर रहे थे, तब उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें मदद का और उनके घर आने का आश्वासन दिया था। इसी वादे को पूरा करने के लिए उनके इंदौर आने की चर्चा शुरू हुई थी।
अब पीड़ित परिवार बेसब्री से राहुल गांधी का इंतजार कर रहा है, लेकिन कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और प्रशासनिक बाधाओं के कारण उनका इंतजार लंबा होता दिख रहा है। यह घटनाक्रम लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर रहा है।