प्रदेश में आगामी बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़े तीन अहम पत्र शुक्रवार को सामने आए हैं। इन पत्रों के माध्यम से सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों और कर्मचारियों पर एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू कर दिया गया है। साथ ही डीएलएड परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए हैं और छात्रों को विषय संशोधन का अंतिम अवसर भी दिया गया है।
30 अप्रैल तक लागू रहेगा एस्मा
एस्मा लागू होने के बाद शिक्षक परीक्षा अवधि के दौरान न तो अवकाश ले सकेंगे और न ही किसी प्रकार के आंदोलन, धरना या प्रदर्शन में भाग ले सकेंगे। परीक्षा से संबंधित किसी भी ड्यूटी से इनकार करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। यह व्यवस्था 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। राज्य में 7 फरवरी से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, जिनमें लगभग 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
डीएलएड परीक्षा का परिणाम घोषित
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा संचालित डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रथम एवं द्वितीय वर्ष परीक्षा 2025 (द्वितीय अवसर) का परिणाम 8 जनवरी 2026 को घोषित कर दिया गया है। परीक्षा परिणाम ऑनलाइन जारी किया गया है, जिससे अभ्यर्थी आसानी से अपना रिजल्ट देख सकें। छात्र www.mpbse.mponline.gov.in
पोर्टल पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं। इस घोषणा से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो द्वितीय अवसर परीक्षा में शामिल हुए थे।
विषय संशोधन के लिए अंतिम मौका
माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल ने सत्र 2025-26 की हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिए विषय संशोधन और सुधार की ऑनलाइन सुविधा प्रदान की है। पहले यह सुविधा 21 दिसंबर 2025 तक 500 रुपये प्रति विषय शुल्क के साथ उपलब्ध थी। अब विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विषय संशोधन की अंतिम तिथि 10 जनवरी 2026 तय की गई है। इस अवधि तक छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपने विषयों में सुधार कर सकेंगे। तय तारीख के बाद किसी भी स्तर पर विषय परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों को लेकर सख्त निर्देश
एस्मा लागू होने के बाद मंडल ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षा अवधि के दौरान शिक्षकों की छुट्टियां स्वीकृत नहीं की जाएंगी। इसके साथ ही शिक्षक किसी भी प्रकार की हड़ताल, प्रदर्शन या असहयोग में शामिल नहीं हो सकेंगे। परीक्षा से जुड़ी ड्यूटी को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा, और इससे इनकार करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क
प्रदेश में 7 फरवरी से शुरू होने वाली 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 17 लाख छात्र शामिल होंगे, जबकि साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षक और कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी में तैनात रहेंगे। प्रशासन का मानना है कि परीक्षा संचालन में छोटी सी चूक भी बड़े स्तर पर प्रभाव डाल सकती है। इसी कारण परीक्षा से जुड़ी सेवाओं को आवश्यक सेवा घोषित किया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।